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गंगा में इफ्तार पार्टी पर राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने दिया चौंकाने वाला बयान, बोली-‘इस तरह की हरकतों को…’

वाराणसी के गंगा घाट पर इफ्तार पार्टी को लेकर विवाद बढ़ा, राज्यमंत्री रजनी तिवारी (Rajni Tiwari) ने जताया कड़ा एतराज। जानें पूरा मामला और सरकार का रुख।

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Rajni Tiwari: उत्तर प्रदेश के Varanasi में गंगा घाट पर आयोजित कथित इफ्तार पार्टी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मुद्दे ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज कर दी है। घटना के सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे आस्था से जुड़ा मामला बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे सामाजिक सौहार्द से जोड़कर देखा। इसी बीच प्रदेश सरकार की ओर से भी इस मामले पर सख्त प्रतिक्रिया आई है, जिससे साफ है कि प्रशासन इसे गंभीरता से ले रहा है।

राज्यमंत्री Rajni Tiwari का सख्त रुख

उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री Rajni Tiwari ने इस पूरे मामले पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने साफ कहा कि धार्मिक स्थलों की अपनी एक मर्यादा होती है, जिसका पालन हर हाल में किया जाना चाहिए। हरदोई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि गंगा घाट जैसे पवित्र स्थान पर इस तरह की गतिविधियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अन्य मुद्दों पर भी सरकार का रुख स्पष्ट

कार्यक्रम के दौरान मंत्री Rajni Tiwari से जब अन्य विवादों पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर ऐसे मुद्दों को हवा देते हैं, जिससे माहौल खराब हो। उन्होंने इशारा किया कि सरकार की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर विरोधी तत्व ऐसे विवाद खड़े कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने फिल्मों और मनोरंजन जगत में बढ़ती अश्लीलता पर भी चिंता जताई और कहा कि इस तरह की सामग्री समाज और युवाओं पर गलत असर डालती है, इसलिए इस पर नियंत्रण जरूरी है।

कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर

राज्यमंत्री Rajni Tiwari ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गंगा घाट जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर गतिविधियों की सीमा क्या होनी चाहिए और इसे कैसे संतुलित किया जाए।

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