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“बीजेपी को बंगाल में कौन लाया?” ममता बनर्जी पर भड़के भूपेश बघेल, हार के बाद विपक्षी एकता पर उठाए सवाल

भूपेश बघेल ने ममता बनर्जी पर साधा निशाना, कहा- बीजेपी को बंगाल में मजबूत करने का काम आपने किया। बंगाल चुनाव में TMC की हार के बाद विपक्षी एकता पर बढ़ी सियासत।

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद अब बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी को मजबूत करने का काम खुद ममता बनर्जी ने किया था और अब हार के बाद विपक्षी एकता की बात कर रही हैं। भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि “बीजेपी तो वहां थी ही नहीं, उसे बंगाल में जगह दिलाने का काम आपने किया।” उनके इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी हार के बाद विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है।

 “अब सबकुछ हाथ से निकल गया तो जागीं” — बघेल

भूपेश बघेल ने ममता बनर्जी के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें विपक्षी दलों की ताकत का एहसास बहुत देर से हुआ है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ने पहले बीजेपी को अपना “नैसर्गिक मित्र” बताया था और अब वही बीजेपी उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। बघेल ने कहा, “आज जब सबकुछ हाथ से निकल गया है, तब आप विपक्षी एकता की बात कर रही हैं।” कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय आया है जब ममता बनर्जी ने पूरे देश में बीजेपी विरोधी ताकतों को एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने छात्र संगठनों, युवा संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं से भी एक मंच पर आने की बात कही थी। ममता का कहना है कि बीजेपी को रोकने के लिए समान विचारधारा वाली पार्टियों को साथ आना होगा। हालांकि कांग्रेस के भीतर से ही इस अपील पर सवाल उठने लगे हैं।

वाम दलों को भी साथ लाने की कोशिश में TMC

बीजेपी के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने की कोशिश में ममता बनर्जी ने बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए वाम मोर्चे को भी साथ आने का न्योता दिया है। खास बात यह है कि टीएमसी और वाम दलों के बीच वर्षों से राजनीतिक टकराव रहा है, लेकिन अब बीजेपी को चुनौती देने के लिए ममता ने पुराने विरोधियों के लिए भी दरवाजे खोल दिए हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा और राजनीतिक तनाव बढ़ा है, ऐसे में लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट होना चाहिए। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि टीएमसी अब अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि विपक्षी दलों के कई नेता यह सवाल उठा रहे हैं कि जब टीएमसी सत्ता में थी तब उसने अन्य विपक्षी दलों को कितना महत्व दिया था। ऐसे में विपक्षी एकता की यह कोशिश कितनी सफल होगी, इस पर अभी संशय बना हुआ है।

 बंगाल चुनाव में TMC की बड़ी हार बनी चर्चा का केंद्र

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में टीएमसी को बड़ा झटका लगा। 294 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी केवल 80 सीटों पर सिमट गई, जबकि बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। इसी जीत के साथ Suvendu Adhikari राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। सबसे बड़ा झटका खुद ममता बनर्जी को लगा, जो भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं। उन्हें बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। 15 साल तक सत्ता में रहने वाली टीएमसी के लिए यह हार राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य की राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है और अब सभी दल आने वाले लोकसभा चुनावों की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इसी बीच भूपेश बघेल का बयान विपक्षी राजनीति में नए विवाद को जन्म देता दिखाई दे रहा है।

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