पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पहली बार अप्रत्यक्ष रूप से यह स्वीकार किया है कि भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने उसके आतंकी नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। संगठन की ओर से सोशल मीडिया पर जारी किए गए कथित प्रोपेगेंडा पोस्ट में उस रात का जिक्र बेहद डर और अफरा-तफरी भरे अंदाज में किया गया है। पोस्ट में लिखा गया कि चारों तरफ धमाकों की आवाजें गूंज रही थीं और ऐसा लग रहा था मानो “आसमान से आग बरस रही हो।” आतंकी संगठन ने दावा किया कि हालात इतने भयावह थे कि लोग धार्मिक किताबों में वर्णित प्रलय जैसे दृश्यों को याद करने लगे। इस पोस्ट के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी इसे ऑपरेशन के प्रभाव का बड़ा संकेत मान रही हैं। माना जा रहा है कि भारतीय कार्रवाई ने आतंकी ढांचे को गहराई तक झटका दिया है।
बहावलपुर में तबाही, कई बड़े ठिकाने हुए बर्बाद
जैश-ए-मोहम्मद की ओर से सामने आए संदेशों में बहावलपुर का खास तौर पर जिक्र किया गया है। बहावलपुर को लंबे समय से संगठन का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। पोस्ट में स्वीकार किया गया कि ऑपरेशन के दौरान संगठन के तीन बड़े केंद्र पूरी तरह तबाह हो गए। इनमें उसका कथित मुख्यालय ‘मस्जिद सुभान अल्लाह’ भी शामिल बताया गया है। संगठन ने मारे गए आतंकियों को ‘शहीद’ बताते हुए नुकसान को छिपाने की बजाय उसे धार्मिक रंग देने की कोशिश की। हालांकि, इसी के साथ यह भी कहा गया कि तबाह ठिकानों को दोबारा खड़ा करने का काम शुरू कर दिया गया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान संगठन की कमजोरी और मनोवैज्ञानिक दबाव को दिखाते हैं। आतंकी संगठन अब अपने समर्थकों का मनोबल बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहा है।
महिला विंग की पोस्ट से नए खतरे के संकेत
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात संगठन की कथित महिला विंग ‘अल-मोमिनात’ से जुड़ी पोस्ट को माना जा रहा है। पोस्ट में दावा किया गया कि पिछले तीन दिनों में 2200 से अधिक महिलाओं ने संगठन जॉइन किया है। इसके साथ यह भी कहा गया कि हजारों महिलाओं तक संगठन का संदेश पहुंचाया गया और इसे “खास रहमत” बताया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आतंकी संगठनों की नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें वे ऑनलाइन प्रचार के जरिए महिलाओं और युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से कट्टरपंथी विचार फैलाने का यह तरीका सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एजेंसियां इन ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सीमा पार आतंकी नेटवर्क पर एजेंसियों की पैनी नजर
भारत की सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी ढांचे और उनके डिजिटल नेटवर्क को लेकर सतर्क हैं। माना जा रहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आतंकी संगठनों में डर और बेचैनी बढ़ी है। यही वजह है कि वे ऑनलाइन पोस्ट और भावनात्मक संदेशों के जरिए अपने कैडर को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे इन संदेशों का उद्देश्य केवल प्रचार है या फिर इसके पीछे नई भर्ती और फंडिंग का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में आतंकवाद केवल सीमा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी नई चुनौतियां सामने आएंगी। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऑनलाइन निगरानी और साइबर ट्रैकिंग पहले से ज्यादा अहम हो गई है।
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