प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने की अपील की थी। अब उन्होंने उसी संदेश को खुद पर लागू करते हुए बड़ा उदाहरण पेश किया है। बुधवार को प्रधानमंत्री जब कैबिनेट बैठक में पहुंचे तो उनका काफिला सामान्य दिनों की तुलना में काफी छोटा दिखाई दिया। जानकारी के अनुसार पीएम मोदी सिर्फ चार गाड़ियों के साथ बैठक में पहुंचे। इस कदम को सरकार की मितव्ययिता और ऊर्जा बचत अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव और ईरान युद्ध के कारण दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। ऐसे समय में भारत सरकार लगातार ईंधन की बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी का यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे देश के लिए एक प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में भी इस कदम की काफी चर्चा हो रही है और इसे आम जनता तक मजबूत संदेश पहुंचाने की कोशिश बताया जा रहा है।
आधा हुआ पीएम का काफिला, SPG को दिए गए निर्देश
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक काफिले में शामिल वाहनों की संख्या लगभग 50 प्रतिशत तक कम करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में विशेष सुरक्षा समूह यानी SPG को भी आवश्यक बदलाव करने को कहा गया है। हालांकि सुरक्षा से जुड़े सभी प्रोटोकॉल पहले की तरह लागू रहेंगे और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में प्रधानमंत्री की कई यात्राओं में काफिले का आकार पहले से छोटा देखा गया है। सुरक्षा एजेंसियां ब्लू बुक में तय नियमों के अनुसार नए इंतजामों पर काम कर रही हैं ताकि कम वाहनों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत बनी रहे। पीएम मोदी ने सिर्फ वाहनों की संख्या घटाने पर ही जोर नहीं दिया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी है। जानकारी के अनुसार उन्होंने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाने की इच्छा जताई है। हालांकि इसके लिए नई गाड़ियों की खरीद नहीं की जाएगी, बल्कि मौजूदा संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाएगा। सरकार इसे खर्च में कटौती और हरित ऊर्जा दोनों से जोड़कर देख रही है।
अमित शाह ने भी घटाया अपना काफिला
प्रधानमंत्री मोदी के इस फैसले का असर अब दूसरे वरिष्ठ नेताओं पर भी दिखाई देने लगा है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी अपना काफिला कम कर दिया है। जानकारी के मुताबिक अमित शाह भी हाल की कैबिनेट बैठक में केवल चार गाड़ियों के साथ पहुंचे। पहले उनके काफिले में इससे कहीं अधिक वाहन शामिल होते थे। बीजेपी और सरकार के भीतर इसे एक अनुशासित और प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब देश ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा हो, तब सरकार और उसके प्रतिनिधियों को भी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह कदम मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को भी सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश देता है। आने वाले समय में दूसरे मंत्रालयों और विभागों में भी इसी तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खासतौर पर सरकारी खर्च कम करने और पर्यावरण के अनुकूल नीतियों को बढ़ावा देने के लिए नई पहलें सामने आ सकती हैं।
ऊर्जा संकट और हरित नीति पर सरकार का फोकस
दुनियाभर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति पर असर के कारण कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। भारत भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मोदी का छोटा काफिला केवल सुरक्षा या प्रशासनिक बदलाव का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक व्यापक सोच का हिस्सा बताया जा रहा है। सरकार पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहनों, ग्रीन एनर्जी और ईंधन बचत से जुड़े अभियानों को बढ़ावा दे रही है। अब प्रधानमंत्री का यह कदम उसी दिशा में एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि सरकार आने वाले दिनों में दूसरे विभागों को भी ऊर्जा बचत और खर्च नियंत्रण से जुड़े सुझाव दे सकती है। वहीं सोशल मीडिया पर भी पीएम मोदी के इस फैसले को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कई लोग इसे सकारात्मक पहल बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे प्रतीकात्मक राजनीति के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने खुद उदाहरण पेश कर यह संकेत दिया है कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल जरूरत और जिम्मेदारी के हिसाब से होना चाहिए।
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