तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद अब नया सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री विजय थलापति की सरकार के फ्लोर टेस्ट से पहले विपक्षी पार्टी AIADMK के भीतर बड़ी टूट की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सीवी शनमुगम और विधायक एसपी वेलुमणि के नेतृत्व वाला गुट खुलकर विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के समर्थन में आ गया है। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि AIADMK के कई विधायक मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात कर सरकार को समर्थन देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। दूसरी तरफ पार्टी नेतृत्व को लेकर भी अंदरखाने असंतोष तेज हो गया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी प्रमुख ई पलानीस्वामी के कुछ फैसलों से कई नेता नाराज चल रहे थे और अब वही असंतोष खुलकर सामने आ गया है। फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले यह घटनाक्रम AIADMK के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
“DMK से हाथ मिलाते तो खत्म हो जाती पार्टी” — शनमुगम
AIADMK नेता सीवी शनमुगम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी का जन्म ही DMK के विरोध से हुआ था और पिछले 53 वर्षों से पार्टी की राजनीति उसी विचारधारा पर आधारित रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर कुछ लोग DMK के समर्थन से सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रहे थे, लेकिन अधिकांश नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। शनमुगम ने साफ कहा कि अगर AIADMK ने DMK के साथ गठबंधन किया होता तो पार्टी की पहचान और अस्तित्व दोनों खत्म हो जाते। उन्होंने कहा कि जनता ने इस चुनाव में विजय को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार किया है और अब जनता के फैसले का सम्मान करना जरूरी है। इसी कारण उनका गुट TVK सरकार को समर्थन देने जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल AIADMK को किसी गठबंधन की राजनीति से दूर रहकर खुद को दोबारा मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। शनमुगम के बयान के बाद यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो चुका है।
विजय सरकार को बहुमत के लिए मिला बड़ा सहारा
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय थलापति की TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। पार्टी ने 108 सीटों पर जीत हासिल की, लेकिन बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे रह गई। हालांकि बाद में सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार गठन का रास्ता आसान हो गया। विजय ने खुद दो सीटों से चुनाव जीता है और उन्हें एक सीट छोड़नी होगी, जिसके बाद TVK की संख्या 107 रह जाएगी। लेकिन कांग्रेस के 5 विधायक, CPI और CPI(M) के 2-2 विधायक, वीसीके और IUML के समर्थन के साथ गठबंधन का आंकड़ा 120 तक पहुंच गया है। अब AIADMK के एक गुट के समर्थन की घोषणा के बाद विजय सरकार और मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समर्थन फ्लोर टेस्ट में सरकार को बड़ी राहत देगा। वहीं विपक्ष की भूमिका निभाने वाली DMK अब नई रणनीति बनाने में जुट गई है। राज्य में पहली बार ऐसा माहौल बन रहा है जब पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के बीच फिल्मी दुनिया से आए नेता विजय सत्ता के केंद्र में पूरी मजबूती से दिखाई दे रहे हैं।
AIADMK के भविष्य पर उठने लगे सवाल
AIADMK के भीतर जारी खींचतान ने पार्टी के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी पहले ही लगातार चुनावी हार और नेतृत्व संकट से जूझ रही थी, लेकिन अब खुलकर सामने आए गुटबाजी के संकेत उसके लिए और मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। वेलुमणि ने जल्द महापरिषद की बैठक बुलाने की मांग की है, जिससे यह साफ है कि पार्टी के भीतर बड़ा शक्ति संघर्ष शुरू हो चुका है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर यह विवाद बढ़ा तो आने वाले समय में AIADMK का एक बड़ा धड़ा अलग राह चुन सकता है। दूसरी ओर विजय की TVK इस पूरे घटनाक्रम से राजनीतिक रूप से मजबूत होती दिख रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय लगातार खुद को स्थिर और निर्णायक नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में AIADMK के कुछ विधायकों का समर्थन उनके लिए राजनीतिक बोनस साबित हो सकता है। अब सबकी नजर 13 मई को होने वाले फ्लोर टेस्ट पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि तमिलनाडु की नई सत्ता कितनी मजबूत होकर उभरती है और विपक्ष की राजनीति किस दिशा में जाती है।
