देशभर में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। शुक्रवार से लागू नई कीमतों के मुताबिक पेट्रोल लगभग 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल भी करीब 3 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। इसके साथ ही सीएनजी के दाम में भी 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है, क्योंकि ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता बल्कि रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की कीमतों पर भी दिखाई देता है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि गलती सरकार की है लेकिन इसकी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि अभी तो 3 रुपये का झटका दिया गया है, बाकी वसूली आगे किस्तों में होगी। राहुल गांधी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है और विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
कांग्रेस ने महंगाई को लेकर जताई चिंता
कांग्रेस पार्टी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को सीधे तौर पर महंगाई से जोड़ते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं तब जनता को राहत नहीं दी गई, लेकिन अब वैश्विक तनाव का हवाला देकर लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि ईंधन की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा, जिसका असर खाने-पीने की चीजों, सब्जियों, दूध और रोजमर्रा के सामान पर दिखाई देगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि पहले ही महंगाई से परेशान जनता के लिए यह फैसला नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार टैक्स के जरिए तेल से भारी कमाई करती रही है और अब एक बार फिर आम आदमी पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा रहा है। विपक्षी दलों ने आने वाले दिनों में इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाने के संकेत भी दिए हैं।
सरकार और तेल कंपनियों ने क्या कहा?
सरकार और सरकारी तेल कंपनियों की तरफ से कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को जिम्मेदार बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भारत पर दबाव बढ़ा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाले बदलाव का असर घरेलू कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। इसी तरह डीजल की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय से कीमतों में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया गया था और अब बाजार की स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि विपक्ष सरकार के इस तर्क से सहमत नजर नहीं आ रहा। विपक्ष का कहना है कि जनता पहले से महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ते खर्च से परेशान है, ऐसे में ईंधन की कीमतें बढ़ाना आम आदमी की परेशानी और बढ़ा देगा।
आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आने वाले दिनों में हर घर तक पहुंच सकता है। ट्रक, बस और माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से बाजार में सामान महंगा होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर देश की आर्थिक रफ्तार पर भी पड़ सकता है। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के बजट पर इसका सबसे ज्यादा असर दिखाई दे सकता है। वहीं सीएनजी महंगी होने से ऑटो और टैक्सी किराए में भी बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है। राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा विवाद बन सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे जनता से जुड़ा बड़ा आर्थिक मुद्दा बताकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। दूसरी तरफ सरकार की कोशिश होगी कि वैश्विक हालात और तेल बाजार की मजबूरियों का हवाला देकर फैसले को सही साबित किया जाए। फिलहाल आम लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले समय में कीमतें और बढ़ती हैं या फिर सरकार राहत देने के लिए कोई बड़ा कदम उठाती है।
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