असम की राजनीति में एक बार फिर बड़ा अध्याय जुड़ गया जब Himanta Biswa Sarma ने मंगलवार 12 मई 2026 को लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण समारोह के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनकी बेटी सुकन्या सरमा के बयान की हो रही है। पिता के शपथ लेने के बाद सुकन्या ने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि उनके पिता ने असम के विकास के लिए अपनी जिंदगी का हर पल समर्पित कर दिया है। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा होता है कि उनके पिता नींद में भी असम के विकास और लोगों की बेहतरी की बातें करते रहते हैं।
सुकन्या सरमा ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनके पिता ने परिवार को कभी नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने बताया कि व्यस्त राजनीतिक जीवन के बावजूद हिमंत बिस्वा सरमा हमेशा परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखते रहे हैं। सुकन्या ने कहा कि उन्हें, उनके भाई और उनकी मां को कभी यह महसूस नहीं हुआ कि राजनीति की वजह से परिवार पीछे छूट गया हो। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने हिमंत सरमा की पारिवारिक छवि की भी चर्चा शुरू कर दी है।
बेटी ने बताई अंदर की कहानी
शपथ ग्रहण समारोह के बाद मीडिया से बात करते हुए सुकन्या सरमा ने कहा कि उनके पिता ने असम को नई दिशा देने के लिए दिन-रात मेहनत की है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक लगातार मेहनत और संघर्ष करने के बाद ही उन्हें यह मुकाम मिला है। सुकन्या ने कहा कि आज पूरे परिवार को गर्व है क्योंकि उनके पिता इस सम्मान और जिम्मेदारी के पूरी तरह हकदार थे। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में लगातार आलोचनाओं और आरोपों के बावजूद उनके पिता कभी पीछे नहीं हटे और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहे।
दरअसल, चुनाव के दौरान विपक्ष खासकर कांग्रेस ने हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर कई आरोप लगाए थे। उनकी पत्नी को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी हुई, लेकिन इसके बावजूद हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनावी मैदान में पूरी ताकत के साथ प्रचार जारी रखा। बीजेपी ने असम में मजबूत प्रदर्शन किया और लगातार दूसरी बार सरकार बनाने में सफल रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी की बढ़ती ताकत के पीछे हिमंत बिस्वा सरमा की रणनीति और आक्रामक राजनीतिक शैली की बड़ी भूमिका रही है।
दूसरे कार्यकाल को लेकर हिमंत सरमा का बड़ा विजन
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद Himanta Biswa Sarma ने साफ संकेत दिया कि उनका दूसरा कार्यकाल पहले से ज्यादा तेज़ और आक्रामक विकास मॉडल पर आधारित होगा। उन्होंने कहा कि पहला कार्यकाल सिर्फ ‘ट्रेलर’ था, जबकि अब असली ‘फिल्म’ शुरू होगी। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में असम में विकास कार्यों की गति और बढ़ाई जाएगी तथा राज्य को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए जाएंगे।
उन्होंने राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार के अवसर बढ़ाने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि स्वदेशी समुदायों के भूमि अधिकारों की रक्षा उनकी सरकार की प्राथमिकता रहेगी। बीजेपी नेतृत्व भी लगातार यह दावा कर रहा है कि असम में पिछले कुछ वर्षों में सड़क, निवेश, उद्योग और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे में पार्टी अब दूसरे कार्यकाल में और बड़े लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।
विवादों के बीच भी मजबूत बना रहा नेतृत्व
हालांकि Himanta Biswa Sarma का पहला कार्यकाल कई विवादों से भी घिरा रहा। खासतौर पर बांग्लादेश मूल के बांग्ला भाषी मुसलमानों, जिन्हें राज्य में ‘मियां’ समुदाय कहा जाता है, को लेकर दिए गए उनके बयान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने। विपक्षी दलों ने उन पर समाज को बांटने वाली राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी ने इसे राज्य की सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा मुद्दा बताया।
इसके बावजूद हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता में कोई बड़ी गिरावट नहीं देखी गई। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उनकी प्रशासनिक शैली, तेज फैसले लेने की क्षमता और लगातार जनता के बीच सक्रिय रहने की वजह से वे असम की राजनीति में बेहद मजबूत नेता बन चुके हैं। लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि बीजेपी पूर्वोत्तर में अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत करना चाहती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि हिमंत बिस्वा सरमा अपने दूसरे कार्यकाल में असम को किस नई दिशा में लेकर जाते हैं।
