महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री नितेश राणे ने एक बार फिर मुस्लिम समुदाय को लेकर चर्चा में आने वाला बयान दिया है। उन्होंने कांदिवली में आयोजित सभा में कहा कि वह कभी भी पूरे मुस्लिम समाज के खिलाफ नहीं रहे और आज भी नहीं हैं। नितेश राणे ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रवादी विचारधारा वाले मुसलमान उनके साथ हैं और उनके अधिकारों का हिस्सा हैं। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर बांग्लादेशी रोहिंग्या को मुंबई में नहीं रहने देने की धमकी दी। उनका कहना है कि “15 जनवरी की तारीख याद रखना। अपना-अपना बैग भरकर रख लो।”
खुलेआम किसे दी धमकी?
नितेश राणे ने कांदिवली की सभा में अपने बयान को और स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “मैं खुलेआम धमकी दे रहा हूं। 16 जनवरी के बाद एक भी बांग्लादेशी रोहिंग्या को मुंबई में नहीं रहने देंगे।” उनके इस बयान ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। नितेश राणे ने यह भी कहा कि उन्हें पूरी तरह पता है कि किसे ठोकना है और उनका लक्ष्य केवल गैर-कानूनी रूप से रहने वाले रोहिंग्या पर है।
मुंबई हिंदुओं और राष्ट्रवाद का तर्क
मंत्री ने अपने बयान में मुंबई के सांस्कृतिक और राजनीतिक स्वरूप को भी जोर देकर बताया। उनका कहना है कि मुंबई हिंदुओं की है और यह शहर राष्ट्रवादियों का है। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में केवल वही लोग रह सकते हैं जो देश और राज्य की राष्ट्रवादी विचारधारा को मानते हैं। इस बयान ने सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि रोहिंग्या शरणार्थी बड़ी संख्या में शहर में रहते हैं।
चर्चा में बना बयान
नितेश राणे के इस बयान के बाद राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कई लोग इसे गलत और सांप्रदायिक बता रहे हैं, वहीं समर्थक इसे कानून और राष्ट्रवाद के नजरिए से सही ठहरा रहे हैं। नागरिक अधिकार संगठन और शरणार्थी अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी चिंता जताई है और कहा है कि इस तरह की धमकियां समाज में विभाजन पैदा कर सकती हैं। स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन मुंबई पुलिस और अन्य एजेंसियां इस मामले की निगरानी कर रही हैं।
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