उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर विवाद के बीच महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि का बयान सामने आया है। उत्तराखंड से सहारनपुर पहुंचे स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने SSP कार्यालय जाकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से मुलाकात की। उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में हुई कार्रवाई के लिए पुलिस और प्रशासन की सराहना की। उनका कहना था कि कलेक्ट्रेट शासन और प्रशासन का प्रमुख केंद्र है, इसलिए वहां प्रशासनिक कामकाज ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई पुलिस ने अपने स्तर पर नहीं की, बल्कि मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई।
मस्जिद और कुएं को लेकर उठाए कई सवाल
महामंडलेश्वर ने कलेक्ट्रेट परिसर में धार्मिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक परिसर में नमाज पढ़ने का कोई औचित्य नहीं है। कार्रवाई के बाद सामने आई कुएं जैसी संरचना का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे हिंदू धार्मिक परंपरा से जोड़ने की बात कही और पूरे मामले की जांच की मांग की। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि संरचना की वास्तविक स्थिति को लेकर जांच अभी जारी है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में सही तस्वीर सामने आएगी। उन्होंने 1906 और 1909 लिखी ईंटों का भी जिक्र किया और कहा कि इन पर लिखे साल किसी भट्ठे के निशान या ट्रेडमार्क से जुड़े हो सकते हैं।
वक्फ की जमीन के दावे पर भी साधा निशाना
स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने मस्जिद की जमीन को लेकर किए जा रहे दावों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर जमीन वक्फ की थी तो संबंधित पक्ष को इसके समर्थन में दस्तावेज अदालत में पेश करने चाहिए थे। उनका दावा था कि मामला सिटी मजिस्ट्रेट और जिला अदालत तक पहुंचा, लेकिन संबंधित पक्ष अपने दावे के समर्थन में जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा सका। हालांकि, जमीन और निर्माण से जुड़े सभी दावों की अंतिम स्थिति कानूनी और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। उन्होंने इस पूरे मामले में बिना जांच अंतिम निष्कर्ष निकालने से भी बचने की बात कही।
‘दिक्कत है तो पाकिस्तान-बांग्लादेश चले जाइए’
कार्रवाई का विरोध करने वालों को लेकर महामंडलेश्वर ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर किसी को मस्जिद हटाने की कार्रवाई से परेशानी है तो वह पाकिस्तान या बांग्लादेश जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत संविधान और कानून के अनुसार चलता है और सभी को नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी पक्ष को कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट समेत कानूनी रास्ता अपना सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर किसी के पास पाकिस्तान या बांग्लादेश जाने का किराया नहीं है तो वह उनसे पैसे ले सकता है और वह किराया देने के लिए तैयार हैं।
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