बिहार में NDA सरकार के भीतर सहयोगी दलों के बीच मतभेद की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। सीवान के सर्किट हाउस में शुक्रवार को महाराजगंज से JDU विधायक हेम नारायण साह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फरक्का संधि को लेकर पार्टी का रुख सामने रखा। JDU की ओर से इस समझौते को खत्म करने की मांग की जा रही है। पार्टी का कहना है कि बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य के हिस्से के पानी को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। इस मुद्दे पर JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा भी अपनी बात रख चुके हैं।
विधायक ने कहा- बीजेपी और JDU अलग-अलग पार्टियां हैं
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब हेम नारायण साह से पूछा गया कि अगर राज्य में सरकार NDA की है तो उनकी मांग किससे है, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बीजेपी और JDU अलग-अलग राजनीतिक दल हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां भले ही एक साथ सरकार चला रही हों, लेकिन उनका एजेंडा अलग है। विधायक का यह बयान ऐसे समय आया है जब फरक्का संधि को लेकर बिहार के हितों और गंगा के पानी से जुड़े सवालों पर राजनीतिक बहस चल रही है। उनके बयान ने गठबंधन की अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है।
1996 में हुई थी फरक्का संधि
फरक्का संधि भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में हुई थी। इस समझौते का संबंध गंगा नदी के पानी के बंटवारे से है। JDU नेताओं का कहना है कि बिहार के हितों को भी इस मुद्दे में प्रमुखता मिलनी चाहिए। संजय झा ने कहा है कि अगर संधि को आगे बढ़ाने की बात होती है तो पहले बिहार के हिस्से को लेकर स्थिति साफ होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर JDU नेताओं ने सीवान में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान बड़हरिया विधायक इंद्रदेव सिंह पटेल, जीरादेई विधायक भीष्म प्रताप सिंह कुशवाहा और पार्टी जिलाध्यक्ष विकास कुमार सिंह भी मौजूद रहे।
हेम नारायण साह के बयान के बाद BJP के रुख पर नजर
हेम नारायण साह महाराजगंज विधानसभा क्षेत्र से JDU के विधायक हैं और लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। उनके बयान के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस पर BJP की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है। हालांकि, किसी एक विधायक के बयान को पूरे गठबंधन के रुख के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी, लेकिन बिहार की राजनीति में ऐसे बयान निश्चित रूप से चर्चा का विषय बनते हैं। NDA सरकार में JDU और BJP साथ हैं, लेकिन फरक्का संधि जैसे बिहार से जुड़े मुद्दे पर दोनों दलों की प्राथमिकताओं को लेकर आगे की तस्वीर क्या होगी, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।
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