असम के गोलाघाट जिले में एक जंगली हाथी उस समय मुसीबत में फंस गया, जब उसके गले में एक भारी टायर अटक गया। हाथी नुमालीगढ़ के आबादी वाले इलाके के आसपास घूमता दिखाई दिया। गले में फंसे टायर के कारण उसे काफी परेशानी हो रही थी। हाथी की हालत देखकर स्थानीय लोग भी चिंतित हो गए। मामला मोरंगी इलाके के बाकियल फॉरेस्ट ब्लॉक का बताया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद खु्मताई विधायक मृणाल सैकिया ने वन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और लोगों से हाथी के पास नहीं जाने तथा शोर न करने की अपील की।
वन विभाग की टीम ने बेहद सावधानी से चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
हाथी के बारे में जानकारी मिलते ही असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) संदीप के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम के सामने चुनौती यह थी कि हाथी को ज्यादा परेशान किए बिना उसके गले से भारी टायर निकाला जाए। वनकर्मियों ने पूरी सावधानी और तकनीकी तरीके से हाथी को नियंत्रित किया और इसके बाद टायर को उसके गले से बाहर निकाल दिया। रेस्क्यू के दौरान हाथी और टीम के सदस्यों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। राहत की बात यह रही कि ऑपरेशन के दौरान किसी को चोट नहीं आई। टायर निकलने के बाद हाथी की स्थिति पर भी नजर रखी गई।
CM और वन मंत्री ने टीम की तारीफ की
इस रेस्क्यू की जानकारी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया के जरिए साझा की। उन्होंने कहा कि इंसान हो या जानवर, असम में किसी को परेशानी में नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि हाथी के गले में फंसा टायर उसके लिए गंभीर खतरा बन सकता था, इसलिए समय रहते कार्रवाई की गई। वन मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने भी रेस्क्यू टीम की सराहना की। टायर हटाने के बाद हाथी को कुछ समय निगरानी में रखा गया। स्थिति सामान्य होने पर वह अपने झुंड के साथ जंगल की ओर लौट गया। इस घटना ने यह भी दिखाया कि जंगलों के आसपास फेंका गया कचरा और पुराने टायर वन्यजीवों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।
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