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जरांगे के मुंबई कूच पर अब क्या होगा? बॉम्बे HC ने रोक लगाने से किया इनकार, जानिए पूरा मामला

Manoj Jarange Patil के मुंबई आंदोलन पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है। जानिए कोर्ट ने रोक लगाने से क्यों इनकार किया और आंदोलन को लेकर क्या कहा।

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Manoj Jarange Patil News: मनोज जरांगे पाटिल के प्रस्तावित मुंबई आंदोलन को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मनोज जरांगे पाटिल (Manoj Jarange Patil) को मुंबई आने से रोकने या उनके आंदोलन पर पहले से पाबंदी लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया है। मुंबई में संभावित प्रदर्शन को रोकने की मांग को लेकर निलेश डहाणूकर और राजेश दलवी की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। इसमें खास तौर पर आजाद मैदान में आंदोलन की अनुमति नहीं देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने पिछली बार हुए आंदोलन का हवाला देते हुए आशंका जताई थी कि दोबारा बड़े प्रदर्शन से दक्षिण मुंबई में आम लोगों और यातायात से जुड़ी परेशानियां पैदा हो सकती हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने केवल पिछली घटनाओं के आधार पर इस बार प्रदर्शन पर रोक लगाने से सहमति नहीं जताई।

हाईकोर्ट ने मौलिक अधिकार का दिया हवाला

इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस महेश त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच के सामने हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। अदालत का कहना था कि पिछले आंदोलन के दौरान क्या परिस्थितियां बनी थीं, केवल उस आधार पर भविष्य में होने वाले किसी आंदोलन को पहले ही प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। यानी जरांगे पाटिल के मुंबई आने या आंदोलन करने पर सीधे रोक लगाने के लिए मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर ठोस वजह जरूरी होगी। कोर्ट के इस रुख से फिलहाल मनोज जरांगे पाटिल (Manoj Jarange Patil) के समर्थकों के मुंबई पहुंचने की संभावनाओं पर कानूनी रोक नहीं लगी है।

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याचिकाकर्ताओं ने पिछली घटना का क्यों दिया हवाला?

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि पिछले आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दक्षिण मुंबई पहुंच गए थे। इससे इलाके में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई थीं और लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा था। याचिका में यह भी बताया गया कि पिछले साल हुए आंदोलन के दौरान हालात को देखते हुए आखिरकार हाईकोर्ट को आजाद मैदान खाली कराने के निर्देश देने पड़े थे। इसी पुराने अनुभव को आधार बनाकर इस बार संभावित आंदोलन को पहले ही रोकने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने पिछली स्थिति को भविष्य के आंदोलन पर स्वत: रोक लगाने का पर्याप्त आधार नहीं माना। कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि आंदोलन की स्थिति बनने पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकार और स्थानीय प्रशासन की होगी।

14वें दिन भी जारी है जरांगे का अनशन, मुंबई कूच के संकेत

मनोज जरांगे पाटिल (Manoj Jarange Patil) इस समय जालना में अनशन पर हैं और 11 सितंबर को उनके अनशन का 14वां दिन बताया गया है। इसी दौरान उन्होंने मुंबई की ओर कूच करने के संकेत दिए हैं। मनोज जरांगे पाटिल (Manoj Jarange Patil) के आंदोलन का मुद्दा पहले भी महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासन के लिए चुनौती बन चुका है। ऐसे में मुंबई में दोबारा बड़े प्रदर्शन की संभावना ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि हाईकोर्ट के ताजा फैसले से इतना साफ है कि अदालत ने फिलहाल जरांगे को मुंबई आने से रोकने का आदेश नहीं दिया है। अब आगे आंदोलन की दिशा, प्रदर्शन का स्थान, प्रशासन की तैयारियां और जरांगे की अगली घोषणा पर नजर रहेगी। अगर बड़ी संख्या में समर्थक मुंबई पहुंचते हैं तो सरकार के सामने आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने और शहर की सामान्य व्यवस्था बनाए रखने की दोहरी चुनौती होगी।

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