लोकसभा में ईरान से जुड़े एक मुद्दे पर पूछे गए सवाल ने अचानक राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद Mahua Moitra ने भारत-ईरान संबंधों को लेकर विदेश मंत्रालय से तीन हिस्सों में सवाल पूछा था। यह सवाल अतारांकित था, इसलिए सरकार ने इसका लिखित जवाब दिया। हालांकि, इस सवाल में एक तथ्यात्मक गलती सामने आई, जिसे सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट करते हुए इंगित किया। इस घटना के बाद संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।
क्या थी सवाल में गलती?
महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) ने अपने सवाल में 2024 में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति Hassan Rouhani की मृत्यु का जिक्र किया था और पूछा था कि उस दौरान भारतीय प्रतिनिधि ने किस स्तर पर शोक व्यक्त किया। लेकिन सरकार ने अपने जवाब में साफ किया कि 2024 में हसन रूहानी राष्ट्रपति नहीं थे और उनकी मृत्यु भी नहीं हुई है। दरअसल, रूहानी 2013 से 2021 तक राष्ट्रपति रहे थे और उनके बाद Ebrahim Raisi ने पद संभाला था, जिनकी 2024 में मृत्यु हुई थी। इसी तथ्यात्मक गलती की वजह से सरकार ने पहले सवाल को ही अप्रासंगिक बताया।
विदेश मंत्रालय का आधिकारिक जवाब
विदेश मंत्रालय की ओर से राज्य मंत्री Kirti Vardhan Singh ने 27 मार्च को लिखित जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहला सवाल गलत तथ्यों पर आधारित है, इसलिए उसका उत्तर नहीं बनता। दूसरे सवाल के जवाब में बताया गया कि ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के निधन के बाद 5 मार्च 2026 को भारत के विदेश सचिव ने दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में जाकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे। तीसरे सवाल के जवाब में भी मंत्रालय ने कहा कि वह लागू नहीं होता। इस जवाब के जरिए सरकार ने न सिर्फ स्थिति स्पष्ट की बल्कि पूछे गए सवाल की त्रुटि को भी सामने रखा।
विदेश नीति पर जारी है सियासी घमासान
इस पूरे मामले के बीच भारत की विदेश नीति को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। विपक्ष, खासकर Rahul Gandhi और अन्य दल, सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि उसने Iran से जुड़े मामलों में अपनी पारंपरिक नीति बदल दी है। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर हुए हमलों और मौतों को लेकर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं, सरकार का पक्ष है कि वह अंतरराष्ट्रीय मामलों में संतुलित और कूटनीतिक रुख अपनाती है। इस बीच महुआ मोइत्रा के सवाल में हुई गलती ने इस बहस को और तीखा बना दिया है, जिससे आने वाले दिनों में संसद और राजनीति में इस मुद्दे पर और चर्चा होने की संभावना है।
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