बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के विधायक पद से इस्तीफा देने की पूरी तैयारी हो चुकी थी और रविवार को इसे औपचारिक रूप से पूरा किया जाना था। खास बात यह रही कि रविवार के दिन आमतौर पर बिहार विधानसभा बंद रहती है, लेकिन इस बार विशेष व्यवस्था के तहत इस्तीफे की प्रक्रिया पूरी करने की योजना बनाई गई थी। विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार भी इस अहम प्रक्रिया के लिए दिल्ली से पटना पहुंच गए थे और सुबह विधानसभा भी पहुंचे। बावजूद इसके, नितिन नवीन वहां नहीं पहुंचे और इस्तीफा टल गया, जिससे सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
असम रवाना होने से बदला पूरा समीकरण
सूत्रों के मुताबिक, नितिन नवीन को पार्टी की ओर से असम में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी वजह से वह रविवार को पटना से असम के लिए रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि पार्टी का कार्यक्रम पहले से तय था, जिसके चलते उनका विधानसभा पहुंचना संभव नहीं हो पाया। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने साफ किया है कि इस्तीफा जल्द ही दे दिया जाएगा और इसमें ज्यादा देरी नहीं होगी।
30 मार्च की डेडलाइन बढ़ा रही दबाव
बिहार विधानसभा के नियमों के अनुसार, यदि कोई सदस्य दूसरे सदन के लिए चुना जाता है तो उसे 14 दिनों के भीतर अपने मौजूदा पद से इस्तीफा देना अनिवार्य होता है। नितिन नवीन 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे, ऐसे में उनके इस्तीफे की अंतिम तारीख 30 मार्च है। अब समय बेहद कम बचा है और ऐसे में जल्द से जल्द इस्तीफा देना जरूरी हो गया है। अगर इसमें देरी होती है तो नियमों के तहत सवाल भी खड़े हो सकते हैं।
सीएम नीतीश के फैसले पर भी टिकी नजरें
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और बड़ी खबर सामने आ रही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। ऐसे में बिहार की राजनीति में एक साथ कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि नितिन नवीन आखिर कब इस्तीफा देंगे और क्या वह तय समय सीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी कर पाएंगे।
