राजधानी दिल्ली के लुटियंस जोन में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्ष के दिग्गज नेता अचानक एकजुट होकर प्रदर्शन करने पहुंचे। माहौल तब बेहद गर्म हो गया जब पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए सख्त कदम उठाए। पीएम आवास के बाहर जोरदार नारेबाजी कर रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पुलिस ने मौके से डिटेन कर लिया। वहीं, इस विरोध प्रदर्शन में शामिल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी सुरक्षा बलों ने फौरन प्रदर्शनस्थल से हटा दिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं।
DCP से तीखी बहस और हिरासत का फरमान
घटना की शुरुआत तब हुई जब नई दिल्ली जिले के डीसीपी खुद राहुल गांधी के पास पहुंचे और उन्हें शांतिपूर्वक धरना खत्म करने की सलाह दी। डीसीपी ने राहुल गांधी से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “आप प्लीज कॉपरेट करिए।” इस पर राहुल गांधी ने तुरंत जवाब दिया कि वे तो पूरा सहयोग कर रहे हैं, बल्कि पुलिस को वहां मौजूद बाकी लोगों को हटने के लिए कहना चाहिए। इसके बाद डीसीपी ने भीड़ से एक बार पीछे हटने का आग्रह किया, लेकिन जब कोई नहीं माना, तो उन्होंने अधिकारियों को तुरंत सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का सख्त निर्देश दे दिया।
पुलिस से हाथ छुड़ाकर सड़क पर लेटे नेता प्रतिपक्ष
हिरासत में लिए जाने की प्रक्रिया शुरू होते ही वहां का नजारा बेहद नाटकीय हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुलिस की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। जब एक पुलिसकर्मी ने उन्हें ले जाने के लिए उनका हाथ पकड़ा, तो राहुल गांधी सख्त गुस्से में आ गए। उन्होंने तुरंत अपना हाथ झटककर छुड़ाया और अपना विरोध दर्ज कराने के लिए वहीं पक्की सड़क पर लेट गए। पुलिस अधिकारियों को उन्हें उठाने और गाड़ी तक ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रियंका गांधी भी इस दौरान लगातार सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाती रहीं।
लुटियंस दिल्ली में भारी सुरक्षा बल तैनात
विपक्षी दिग्गजों के इस आक्रामक रुख को देखते हुए पूरे नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ा कर दी गई है। पीएम आवास की ओर जाने वाले कई रास्तों पर बैरिकेडिंग लगा दी गई है और भारी संख्या में पुलिस बल के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। अचानक हुए इस घटनाक्रम के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह कदम प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रदर्शन करने और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के कारण उठाया गया।
