दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक दर्दनाक हादसे से हड़कंप मच गया। शिव मंदिर के पास एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। बताया जा रहा है कि इस बिल्डिंग में छात्रों के रहने के लिए PG चल रहा था। हादसे के वक्त कई छात्र अपने कमरों में मौजूद थे। अचानक पूरी इमारत के गिरने से उनके मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए और मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया गया।
‘जो कमरे में थे, मलबे में दब गए’
एक चश्मदीद के मुताबिक, इमारत का नाम ‘हॉस्टल डेज’ बताया जा रहा है। हादसे के समय जो छात्र अपने कमरों के अंदर थे, उनके मलबे में फंसे होने की आशंका है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ छात्र घायल अवस्था में भी बाहर निकाले गए हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने दावा किया कि मलबे के नीचे करीब 30 से 40 छात्रों के फंसे होने की आशंका है। हालांकि, फंसे लोगों की वास्तविक संख्या की पुष्टि अभी नहीं हुई है। राहत टीम मलबे के अंदर लोगों की तलाश कर रही है।
पतली गलियों ने बढ़ाई बचाव टीम की मुश्किल
हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि सत्य निकेतन की गलियां काफी संकरी हैं, जिसकी वजह से भारी मशीनों को घटनास्थल तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है। चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के बाद कई एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं और घायलों को अस्पताल भेजने का काम शुरू किया गया। दिल्ली दमकल विभाग को घटना की जानकारी दोपहर करीब 1:30 बजे मिली थी। इसके बाद दमकल की पांच गाड़ियां और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। बचाव अभियान लगातार जारी है।
PG में निर्माण कार्य को लेकर भी उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने इमारत में चल रहे कथित निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठाए हैं। एक स्थानीय छात्रा ने आरोप लगाया कि बिल्डिंग के नीचे काफी समय से काम चल रहा था। उसने यह भी सवाल उठाया कि अगर इलाके में बड़ी संख्या में PG संचालित हो रहे हैं तो उनकी सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण नियमों की जांच क्यों नहीं हुई। फिलहाल प्रशासन की ओर से हादसे की वास्तविक वजह और मलबे में फंसे लोगों की संख्या को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। राहत-बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही नुकसान की सही तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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