लखनऊ के व्यस्त शहीद पथ पर शनिवार देर रात एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया, जब गोरखपुर से सूरत जा रही एक तेज रफ्तार डबल डेकर बस अचानक आग का गोला बन गई। सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र स्थित मेदांता अस्पताल के ठीक सामने यह दिल दहला देने वाली घटना घटी, जिससे रात के सन्नाटे में चीख-पुकार मच गई। बस के पिछले हिस्से से अचानक किसी भारी चीज के टूटने की आवाज आई और पलक झपकते ही लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी आगोश में ले लिया, जिससे सड़क पर गुजर रहे अन्य वाहन चालकों के भी होश उड़ गए। गनीमत यह रही कि इस भीषण अग्निकांड में किसी भी यात्री को खरोंच तक नहीं आई, वरना एक बहुत बड़ा जानी नुकसान हो सकता था।
ड्राइवर राहुल पटेल की देवदूत जैसी सूझबूझ
इस भयानक हादसे के बीच बस के ड्राइवर राहुल पटेल ने अपनी जान की परवाह किए बिना असाधारण सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। राहुल ने बताया कि उन्होंने शनिवार शाम पांच बजे गोरखपुर से सूरत के लिए अपनी यात्रा शुरू की थी और सब कुछ सामान्य चल रहा था, तभी शहीद पथ पर पहुंचते ही उन्हें खतरे का अहसास हुआ। बिना एक पल गंवाए उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए बस को तुरंत सड़क के किनारे लगाया और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुट गए। बस में कुल 32 यात्री सवार थे, जो गहरी नींद में या अपनी यात्रा में व्यस्त थे, लेकिन ड्राइवर की तत्परता ने उन सभी की जिंदगी बचा ली। सभी यात्रियों को एक-एक करके सुरक्षित नीचे उतार लिया गया, जिसके कुछ ही मिनटों के भीतर पूरी बस आग की भीषण लपटों में पूरी तरह स्वाहा हो गई।
दमकल की मशक्कत और लगा लंबा जाम
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मच गया, और पीजीआई फायर स्टेशन से तुरंत तीन दमकल गाड़ियों को मौके के लिए रवाना किया गया। दमकल कर्मियों ने घंटों कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया, लेकिन तब तक डबल डेकर बस का केवल लोहे का ढांचा ही बचा था। एडीसीपी साउथ रल्ला पल्ली वसंथ कुमार और एसीपी गोसाईंगंज ऋषभ यादव जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इस हादसे के चलते शहीद पथ पर चिनहट से कानपुर रोड की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया। ट्रैफिक पुलिस ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए यातायात को डायवर्ट किया और बाद में क्रेन की मदद से जली हुई बस को हटाकर रास्ते को सुचारू बनाया।
सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े होते बड़े सवाल
यह घटना भले ही एक बड़े हादसे में तब्दील होने से बच गई हो, लेकिन लंबी दूरी तय करने वाले निजी और कॉमर्शियल वाहनों की तकनीकी फिटनेस पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आखिर एक चलती बस में अचानक इस तरह शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी के चलते आग कैसे लग गई, इसकी गहन जांच की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश के व्यस्ततम मार्गों में शुमार शहीद पथ पर इस तरह की घटनाएं यात्रियों की सुरक्षा के दावों की पोल खोलती हैं। यदि ड्राइवर राहुल पटेल ने जरा सी भी देर कर दी होती या वे घबरा जाते, तो 32 जिंदगियों को बचाना असंभव हो जाता। प्रशासन और परिवहन विभाग को अब ऐसे स्लीपर और डबल डेकर वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर और अधिक सख्त कदम उठाने की सख्त जरूरत है।
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