देश की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया जब पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुए राष्ट्रव्यापी Gen-Z आंदोलन और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के कड़े विरोध के आगे सरकार को झुकना पड़ा। बढ़ते दबाव के बीच आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर अपने इस्तीफे की पुष्टि की और बताया कि उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पहले दिन से इस स्थिति की जिम्मेदारी लेते रहे हैं और पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें अंदर से झकझोर कर रख दिया है। उनके अनुसार, यह मामला किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश की एकता और राष्ट्र विरोधी ताकतों को रोकने का है।
इस्तीफे के तुरंत बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान के आवास
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की घोषणा के साथ ही दिल्ली के सियासी गलियारों में सरगर्मी अचानक बहुत तेज हो गई। इसी कड़ी में एक बड़ा अपडेट सामने आया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तुरंत 6, कुशक रोड (धर्मेंद्र प्रधान का आवास) पहुंचे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अमित शाह वहां करीब आधे घंटे तक रुके और इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रधान के साथ मौजूदा राजनीतिक हालातों, इस्तीफे के बाद की परिस्थितियों और देश के विभिन्न हिस्सों में भड़के रोष पर गहन चर्चा की। इस अचानक हुई बैठक ने राजनीतिक पंडितों के कान खड़े कर दिए हैं कि आने वाले समय में सरकार का अगला कदम क्या होगा।
जंतर-मंतर के हालात
एक तरफ जहां शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ कम होने लगी है और दिल्ली पुलिस ने राहत की सांस ली है, वहीं दूसरी तरफ सियासी मोर्चे पर बैठकों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। संविधान क्लब में सरकार और प्रतिनिधियों के बीच चल रही वार्ताओं के बीच अमित शाह का यह दौरा इस बात का संकेत देता है कि सत्ता के गलियारों में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तेजी से रणनीति बनाई जा रही है। विपक्ष की पैनी नजरें इन तमाम घटनाक्रमों पर टिकी हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार इस बड़े राजनीतिक संकट से निपटने के लिए आगे क्या मास्टरस्ट्रोक चलती है।
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