उज्जैन में श्री खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने या स्थानांतरित करने को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रशासन ने फिलहाल किसी अंतिम कार्रवाई से इनकार किया है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और सड़क विस्तार के बीच प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था और प्रतिमा की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ा जाएगा। सोशल मीडिया पर मशीनों से प्रतिमा हटाने की खबरों को प्रशासन ने भ्रामक बताया है।
तकनीकी रिपोर्ट के बाद ही होगा फैसला
नगर निगम उपायुक्त संतोष टैगोर के मुताबिक मंदिर परिसर में गुंबद और दीवार हटाने का काम पुजारी की सहमति से किया गया है। प्रतिमा का तकनीकी परीक्षण भी कराया जा चुका है, लेकिन इसकी रिपोर्ट अभी प्रशासन को नहीं मिली है। अधिकारियों का कहना है कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक प्रतिमा के विस्थापन को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही सभी संबंधित पक्षों की सहमति भी ली जाएगी।
डेढ़ किलोमीटर सड़क का हो रहा विस्तार
उज्जैन में करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण और विस्तार का काम चल रहा है। इसी विकास कार्य के दौरान प्रतिमा को लेकर विवाद सामने आया है। वहीं सम्राट विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद् प्रो. डॉ. रमण सोलंकी ने प्रतिमा को लेकर अहम संभावना जताई है। उनके अनुसार यह प्रतिमा मालवा क्षेत्र के विशेष बेसाल्ट पत्थर से बनी हो सकती है और इसकी शिल्पकला में परमार काल की झलक दिखाई देती है।
ASI की सलाह के बाद ही आगे बढ़ने की बात
डॉ. सोलंकी के मुताबिक प्रतिमा को प्राचीन तकनीक से किसी विशेष लॉकिंग सिस्टम के जरिए स्थापित किया गया हो सकता है। ऐसे में इसे हटाने से पहले विशेषज्ञों की राय लेना जरूरी है। उन्होंने मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से तकनीकी सलाह लेने का सुझाव दिया है। फिलहाल प्रशासन भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। तकनीकी रिपोर्ट और सभी पक्षों की सहमति के बाद ही तय होगा कि प्रतिमा को मौजूदा स्थान पर रखा जाएगा या किसी अन्य व्यवस्था पर विचार होगा।
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