मेरठ के सरधना क्षेत्र में रहने वाले एक युवक की शादी महज पाँच दिन पहले ही हुई थी। परिवार के लिए यह खुशियों का समय था, लेकिन सुहागरात ने सभी को अचानक चिंता में डाल दिया। शादी की रस्में पूरी करने के बाद दुल्हन और दूल्हा अपने कमरे में भेजे गए थे। इसी दौरान युवक कुछ सामान लाने की बात कहकर बाहर निकला और फिर अचानक लापता हो गया। दुल्हन रातभर इंतजार करती रही, लेकिन दूल्हा वापस नहीं आया। शुरू में परिवार ने सोचा कि शायद वह किसी दोस्त से मिलने चला गया होगा, लेकिन देर रात बीतने के बावजूद जब उसका कोई पता नहीं चला, तो माहौल चिंताजनक हो गया। परिजनों ने तुरंत रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क किया, मगर किसी के पास भी युवक की कोई जानकारी नहीं थी। दुल्हन भी घबराई हुई थी और परिवार के लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर सुहागरात के दिन ऐसा क्या हुआ कि युवक बिना बताए गायब हो गया।
गुमशुदगी दर्ज, गंगनहर में तलाश तक की नौबत
जब दो दिन बीत गए और युवक का कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई। युवक के अचानक लापता होने से कई तरह की आशंकाएँ पैदा हो गईं। चूँकि घर के पास गंगनहर भी थी, इसलिए परिवार को डर था कि कहीं उसने तनाव में कोई गलत कदम तो नहीं उठा लिया। इसी आशंका के कारण पुलिस ने पीएसी के गोताखोर बुलवाए और नहर में उसकी तलाश भी कराई गई।
कई घंटे तक चली खोजबीन में भी युवक का कोई पता नहीं लगा। परिवार की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। दुल्हन, जिसने अभी-अभी घर में कदम रखा था, खुद को दोषी समझने लगी और लगातार यही सवाल करती रही कि आखिर पति क्यों चले गए? घर में माहौल तनावपूर्ण था और सभी को सबसे बुरा होने का डर सताने लगा था।
पाँचवें दिन फोन आया और खुला राज
इसी बीच सोमवार की सुबह अचानक युवक के पिता के मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाला कोई और नहीं, बल्कि खुद लापता दूल्हा था। उसने बताया कि वह हरिद्वार में है और सुरक्षित है। आवाज सुनते ही पिता की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी ताकि उसे सुरक्षित वापस लाया जा सके। पुलिस टीम हरिद्वार पहुँची और वहाँ युवक को सकुशल पाया। पूछताछ में उसने बताया कि शादी और नई जिम्मेदारियों को लेकर वह पहले से ही मानसिक दबाव में था। सुहागरात पर दुल्हन को देखकर वह अचानक घबरा गया और मानसिक रूप से खुद को संभाल नहीं पाया। इसी तनाव में वह चुपचाप घर से निकल गया और सीधे हरिद्वार पहुँच गया, जहाँ वह पिछले पाँच दिनों से इधर-उधर घूम रहा था।
मानसिक दबाव में लिया था फ़ैसला, परिवार ने लिया राहत का साँस
युवक ने पुलिस को बताया कि वह किसी से संपर्क नहीं करना चाहता था, इसलिए फोन भी बंद कर दिया था। पाँच दिन बाद जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, तब उसने पिता को फोन करके खुद को वापस घर ले जाने की बात कही। पुलिस ने औपचारिक कार्यवाही पूरी करने के बाद युवक को उसके परिजनों के हवाले कर दिया।
घर लौटते ही परिजन और दुल्हन ने राहत की साँस ली। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि युवक तनाव में था और उसे भावनात्मक रूप से समझने की जरूरत है। अब परिवार युवक की काउंसलिंग करवाने की तैयारी कर रहा है ताकि आगे ऐसी स्थिति न बने। यह मामला बताता है कि विवाह जैसे बड़े बदलावों के दौरान मानसिक दबाव कितना असर डाल सकता है और समय रहते बातचीत व समझदारी से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
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