उत्तर प्रदेश की सियासत में रविवार का दिन भारी उथल-पुथल वाला रहा। योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पिछले कई दिनों से अटकलों का बाजार गर्म था, लेकिन जब राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह शुरू हुआ, तो कई चेहरों की मुस्कुराहट गायब हो गई। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम कौशाम्बी की चायल सीट से विधायक पूजा पाल का रहा। चर्चा थी कि सपा से बगावत करने का इनाम उन्हें मंत्री पद के रूप में मिलेगा, लेकिन अंतिम सूची से उनका नाम गायब होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को राज्यपाल से मुलाकात कर जो लिस्ट सौंपी थी, उसमें पूजा पाल का नाम शामिल न होने के बाद अब समाजवादी पार्टी को हमला करने का मौका मिल गया है। अखिलेश यादव की पार्टी ने इस पर तीखा तंज कसते हुए उन्हें ‘बागी’ के बजाय ‘भागी’ विधायक करार दिया है।
सपा का ‘वफादारी’ वाला वार: जो हमारे न हुए, वो भाजपा के क्या होंगे?
पूजा पाल को कैबिनेट में जगह न मिलने पर समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक रुख में तल्खी दिखाई है। सपा ने सीधे तौर पर भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग अपनी विचारधारा और पार्टी को धोखा देकर गए, उन्हें भाजपा ने भी किनारे लगा दिया। सपा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि महिलाओं के सम्मान की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली भाजपा ने मंत्रिमंडल विस्तार में पूजा पाल और अन्य ‘भागी’ विधायकों को जगह न देकर उनकी असलियत दिखा दी है। तंज कसते हुए यहाँ तक कहा गया, “जो धोखा देकर गए हैं, वे किसी के वफादार क्या होंगे? जो हमारे नहीं हो सके, वो आपके क्या होंगे?” यह बयान स्पष्ट करता है कि सपा अब उन विधायकों को राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति पर काम कर रही है जिन्होंने राज्यसभा चुनाव या अन्य मौकों पर भाजपा का साथ दिया था।
राजभवन में शपथ और समीकरण: इन 6 चेहरों की चमकी किस्मत
राजभवन के ‘जन भवन’ में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 6 नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश की गई है। शपथ लेने वालों में सपा से बगावत करने वाले प्रमुख चेहरे मनोज पांडेय का नाम शामिल है, जिन्हें अपनी वफादारी बदलने का सीधा फायदा मिला। उनके साथ ही भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने भी मंत्री पद की शपथ ली। अन्य नामों में हंसराज विश्वकर्मा, कैलाश राजपूत, कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर को राज्य मंत्री बनाया गया है। साथ ही, योगी सरकार ने अपने दो पुराने मंत्रियों अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ाते हुए उन्हें स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी सौंपी है। इस विस्तार के जरिए भाजपा ने आगामी चुनाव और संगठन की मजबूती का संदेश देने का प्रयास किया है।
राजू पाल हत्याकांड से चायल की विधायकी तक: क्या अधर में लटका पूजा पाल का सियासी भविष्य?
पूजा पाल का राजनीतिक सफर संघर्ष और विवादों से भरा रहा है। साल 2005 में उनके पति और तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की सरेआम हत्या कर दी गई थी, जिसका आरोप अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ पर लगा था। पति की विरासत को संभालते हुए पूजा पाल ने बसपा के टिकट पर 2007 और 2012 में जीत दर्ज की। 2017 की हार के बाद वह सपा में शामिल हुईं और 2022 में चायल से विधायक बनीं। हालांकि, राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में झुकाव और मुख्यमंत्री योगी की तारीफ करने के बाद सपा ने उन्हें 2025 में पार्टी से निष्कासित कर दिया था। तब से यह माना जा रहा था कि वह भाजपा सरकार में अहम भूमिका निभाएंगी। लेकिन इस कैबिनेट विस्तार में जगह न मिलना उनके समर्थकों के लिए बड़ा झटका है। अब सवाल यह उठता है कि क्या भाजपा उन्हें भविष्य में कोई और बड़ी जिम्मेदारी देगी या फिर वे ‘अपनों’ और ‘सपनों’ के बीच कहीं खो कर रह जाएंगी?
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