उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन और आम लोगों दोनों को भावुक कर दिया। यहां एक व्यक्ति, जो कई सालों से नशीली दवाइयों और इंजेक्शन का आदी था, अपनी छोटी बेटी के भविष्य के लिए इस लत को छोड़ना चाहता था। लेकिन इलाके में आसानी से मिल रही नशीली दवाइयों के कारण वह बार-बार उसी जाल में फंस जाता था। परेशान होकर वह सीधे जिला अधिकारी के पास पहुंच गया। उसने डीएम के सामने नशीली दवाइयों के इंजेक्शन और सिरिंज दिखाते हुए कहा, “साहब मेरी एक छोटी बेटी है, मैं उसके लिए जीना चाहता हूं। अगर ये नशा ऐसे ही बिकता रहा तो मेरे जैसे कई लोग कभी नहीं सुधर पाएंगे।” एक पिता की यह भावुक अपील सुनकर जिला प्रशासन भी गंभीर हो गया।
डीएम ने तुरंत बनाई टीम, शुरू हुआ गुप्त ऑपरेशन
हापुड़ के जिला अधिकारी अभिषेक पांडेय ने इस शिकायत को हल्के में नहीं लिया। उन्होंने तुरंत पुलिस, राजस्व और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बना दी। छह सदस्यों की इस टीम को इलाके में नशीली दवाइयों की बिक्री की जांच करने का जिम्मा दिया गया। टीम ने पहले गुप्त तरीके से जांच करने का फैसला किया। शिकायत करने वाले व्यक्ति को ही ग्राहक बनाकर कुछ मेडिकल स्टोर्स पर भेजा गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वहां वास्तव में नशीली दवाइयां बेची जा रही हैं या नहीं। जब टीम को यह पुष्टि मिल गई कि बिना उचित अनुमति के इंजेक्शन और अन्य नशीली दवाइयां बेची जा रही हैं, तब प्रशासन ने तुरंत छापेमारी की योजना बनाई।
7 मेडिकल स्टोर्स पर छापा, नशीली दवाइयों का जखीरा बरामद
हापुड़ प्रशासन की टीम ने गढ़ और सिंभावली क्षेत्र में एक साथ कई जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान कुल सात मेडिकल स्टोर्स की जांच की गई। जांच में सामने आया कि कई दुकानों पर नियमों के खिलाफ नशीली दवाइयां और इंजेक्शन बेचे जा रहे थे। इतना ही नहीं, एक मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के संचालित होता भी पाया गया। इसके अलावा एक परचून की दुकान पर भी नशीली दवाइयों का बड़ा स्टॉक बरामद किया गया, जिसे देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। टीम ने मौके से बड़ी मात्रा में इंजेक्शन, दवाइयां और सिरिंज जब्त कर लीं। अधिकारियों ने बताया कि इन दवाइयों का इस्तेमाल अक्सर नशे के लिए किया जाता है और इनकी अवैध बिक्री युवाओं को तेजी से नशे की ओर धकेल रही है।
प्रशासन ने दी चेतावनी, अवैध बिक्री पर होगी कड़ी कार्रवाई
इस कार्रवाई के बाद हापुड़ प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले में नशीली दवाइयों की अवैध बिक्री बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला अधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि मेडिकल स्टोर्स की नियमित जांच की जाए और अगर कहीं भी नियमों का उल्लंघन मिलता है तो तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। अधिकारियों का कहना है कि नशे की समस्या केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे समाज की समस्या है, इसलिए इसे रोकना बेहद जरूरी है। वहीं, जिस पिता ने अपनी बेटी के भविष्य के लिए यह कदम उठाया, उसकी कहानी अब लोगों के लिए एक प्रेरणा बन रही है। यह घटना दिखाती है कि अगर कोई व्यक्ति सच में बदलना चाहता है तो प्रशासन और समाज भी उसका साथ देने के लिए तैयार रहता है।
