मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में शांति की जो उम्मीदें पिछले कुछ समय से परवान चढ़ रही थीं, उन पर अचानक बारूद का धुआं छा गया है। रविवार की सुबह लेबनान की राजधानी बेरूत एक बार फिर दहल उठी। इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों, जिन्हें सामूहिक रूप से ‘दहिया’ कहा जाता है, वहां मौजूद हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। इस सटीक एयरस्ट्राइक में 3 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 15 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि यह हमला ठीक उस वक्त हुआ, जब अमेरिका और ईरान के बीच एक बेहद गोपनीय और ऐतिहासिक शांति समझौता फाइनल होने की कगार पर था। इजरायल के इस आक्रामक कदम के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या सालों की मेहनत से तैयार हुई यह महाडील महज एक धमाके से इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगी?
ईरान का भड़का गुस्सा, ट्रंप ने इजरायल को दिया आखिरी अल्टीमेटम
इस अप्रत्याशित हमले ने ईरान को इस कदर गुस्से से भर दिया है कि उसने फिलहाल इस समझौते को हरी झंडी देने से साफ इनकार कर दिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का धैर्य भी जवाब दे गया। ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सीधे शब्दों में चेतावनी दे डाली है। ट्रंप ने साफ कहा कि रविवार की सुबह बेरूत पर जो हमला हुआ, उसकी कोई जरूरत नहीं थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब हम ईरान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौते के इतने करीब खड़े हैं, तब इजरायल द्वारा इस तरह की कार्रवाई प्रक्रिया में बाधा डालने जैसी है। ट्रंप के इस रुख से साफ है कि अमेरिका अब इस शांति समझौते को किसी भी कीमत पर टूटने नहीं देना चाहता, भले ही इसके लिए उसे अपने सबसे भरोसेमंद दोस्त इजरायल को ही क्यों न रोकना पड़े।
‘हमले बंद करो वरना…’ ट्रंप की दोटूक और नेतन्याहू की मजबूरी
डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को तो स्वीकार किया, लेकिन बेरूत हमले को पूरी तरह से बेमतलब और गैर-जरूरी करार दिया। उन्होंने कहा कि इजरायल को खतरों से निपटने का हक है, लेकिन जिस कार्रवाई का जवाब इस रूप में दिया गया, वह बेहद छोटी और बेमायने थी। ट्रंप ने एक कड़ा अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा कि हम एक ऐसे समझौते के बेहद करीब हैं जो न सिर्फ लेबनान, बल्कि पूरे मिडल ईस्ट के इलाके में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता लेकर आएगा। ट्रंप ने सभी पक्षों को तुरंत पीछे हटने की हिदायत दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इजरायल को लेबनान के किसी भी हिस्से में अब कोई हमला नहीं करना चाहिए, और साथ ही हिज्बुल्लाह या किसी अन्य संगठन को भी इजरायल को निशाना बनाना बंद करना होगा। यह मिडल ईस्ट में एक नए और सुनहरे युग की शुरुआत हो सकती है, जिसे किसी भी हाल में बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए।
बार-बार क्यों फेल हो जाती है शांति की कोशिश? बड़ा सवाल
इतिहास गवाह है कि जब-जब मिडल ईस्ट में शांति स्थापित होने के ठोस नतीजे सामने आने लगते हैं, तब-तब जमीनी स्तर पर अचानक हिंसा और हमले बढ़ जाते हैं। रविवार को लेबनान पर हुआ यह हमला भी इसी कड़वे सच को बयां करता है। इजरायली सेना ने भले ही इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने केवल हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन इस टाइमिंग ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। इस एयरस्ट्राइक के बाद ईरान का गुस्सा सातवें आसमान पर है और पूरी डील अब अधर में लटकती दिखाई दे रही है। अब सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि क्या बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस सख्त हिदायत को मानेंगे, या फिर अपनी जिद के आगे इस महाडील को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे? आने वाले कुछ घंटे तय करेंगे कि यह इलाका शांति की राह पर चलेगा या फिर तबाही के एक नए दौर में प्रवेश करेगा।
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