उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में शनिवार को उस समय राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई जब ज्योतिषपीठाधीश्वर एवं द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ-रक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। वह इन दिनों गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर 81 दिवसीय यात्रा पर निकले हुए हैं। यात्रा के अलीगढ़ पहुंचने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे। इस दौरान शंकराचार्य ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसकी सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने लोगों से भी इस मुद्दे पर जागरूक रहने की अपील की।
‘जो गाय की रक्षा करेगा, वोट उसी को मिलेगा’
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि अब समय आ गया है जब मतदाता केवल चुनावी वादों के आधार पर नहीं, बल्कि काम के आधार पर फैसला करें। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल या नेता गौ-रक्षा के लिए गंभीर प्रयास करेगा और गाय को सम्मान देने की दिशा में कदम उठाएगा, वही जनता के समर्थन का हकदार होगा। उनके अनुसार लोगों को सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं के साथ-साथ अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों को भी महत्व देना चाहिए। इस बयान को राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर वोट और गौ-रक्षा को जोड़ता नजर आया।
सरकार की नीतियों पर भी उठाए सवाल
शंकराचार्य ने अपने भाषण के दौरान वर्तमान सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गौ-रक्षा का मुद्दा लंबे समय से राजनीति का हिस्सा रहा है, लेकिन जनता अब केवल नारों से संतुष्ट नहीं है। लोगों को जमीन पर दिखाई देने वाले परिणाम चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश में गौ-रक्षा को लेकर अपेक्षित स्तर पर काम नहीं हुआ है और इस दिशा में और मजबूत कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि गौ-हत्या जैसे मामलों पर सख्त कानून और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान बना रहे।
नाम बदलने की राजनीति से ज्यादा जरूरी असली मुद्दे
अलीगढ़ के नाम को लेकर समय-समय पर उठने वाली बहस पर भी शंकराचार्य ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि नाम बदलने जैसे मुद्दों से ज्यादा जरूरी समाज और संस्कृति से जुड़े वास्तविक विषय हैं। उनके अनुसार देश के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे समाजहित, संस्कृति संरक्षण और गौ-रक्षा जैसे मुद्दों पर एकजुट होकर काम करें। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में संत, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने गौ-रक्षा के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की।
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