उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को हटाने की कार्रवाई के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया है। प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर के सभी पांचों गेट बंद कर दिए हैं और बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। सुरक्षा के लिए पुलिस और आरएएफ की भारी तैनाती की गई है। इसी बीच कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को भी सहारनपुर जाने से रोक दिया गया। पुलिस ने उन्हें उनके आवास से बाहर नहीं निकलने दिया।
जिला जज के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई
कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को हटाने की कार्रवाई 2 सितंबर को आए जिला जज के आदेश के बाद शुरू हुई। जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई की तैयारी पहले ही कर ली गई थी। जेसीबी और डंपर जैसे वाहन रात में ही कलेक्ट्रेट परिसर पहुंच गए थे। इसके बाद सुबह प्रशासन की मौजूदगी में मस्जिद के ढांचे को हटाने का काम शुरू किया गया। कार्रवाई के दौरान पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।
कलेक्ट्रेट के पांचों गेट किए गए बंद
मस्जिद हटाने की कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर के सभी पांच प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया। किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के साथ रैपिड एक्शन फोर्स यानी आरएएफ को भी तैनात किया गया। प्रशासन की ओर से इलाके में लगातार निगरानी रखी जा रही है। भारी सुरक्षा के बीच मस्जिद के बचे हुए ढांचे को हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
सहारनपुर जाने से पहले इकरा हसन को रोका
मामले की जानकारी मिलने के बाद कैराना से सपा सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की तैयारी में थीं। हालांकि, पुलिस ने उन्हें उनके आवास से बाहर निकलने से रोक दिया और उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोकने की वजह इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताई जा रही है। प्रशासन किसी भी तरह के विरोध या भीड़ जुटने की स्थिति से बचना चाहता है।
कार्रवाई के बीच तनाव, प्रशासन की नजर हालात पर
कलेक्ट्रेट की मस्जिद हटाए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया है और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की मौजूदगी बढ़ाई गई है। फिलहाल कलेक्ट्रेट परिसर में आम लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित है। मस्जिद को हटाने की कार्रवाई को लेकर आगे किसी तरह का विरोध न हो, इसके लिए प्रशासन सतर्क है। अब इस पूरे मामले में राजनीतिक प्रतिक्रिया और स्थानीय स्तर पर उठने वाले कदमों पर भी सभी की नजर बनी हुई है।
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