बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला से सामने आया है, जहां ग्रामीण अर्धसैनिक बल अंसार के हिंदू सदस्य बृजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात उस समय हुई जब बृजेंद्र एक फैक्ट्री परिसर में ड्यूटी पर तैनात थे। आरोप है कि उनके ही साथी नोमान मियां ने अचानक बंदूक तान दी और ट्रिगर दबा दिया। गोली लगते ही बृजेंद्र जमीन पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस सनसनीखेज घटना ने न सिर्फ इलाके में दहशत फैला दी, बल्कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
साथी ही बना कातिल
घटना के बाद स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आईं और आरोपी नोमान मियां को हिरासत में ले लिया गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गोली बेहद करीब से मारी गई थी, जिससे यह साफ होता है कि हमला सुनियोजित था। हालांकि पुलिस अभी हत्या के पीछे की ठोस वजह तलाशने में जुटी है, लेकिन यह तथ्य नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि बृजेंद्र बिस्वास हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखते थे। अंसार बल जैसे अनुशासित संगठन के भीतर इस तरह की हिंसा ने पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्ट्री में मौजूद अन्य कर्मी भी इस घटना से स्तब्ध हैं और डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
मयमनसिंह में पहले भी बह चुका है खून
यह पहला मौका नहीं है जब मयमनसिंह जिले में किसी हिंदू को निशाना बनाया गया हो। कुछ ही दिन पहले इसी जिले में दीपू चंद्र दास नामक हिंदू युवक के साथ हुई बर्बरता ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। दीपू को पहले बेरहमी से पीटा गया, फिर अधमरी हालत में पेड़ से बांधकर जिंदा जला दिया गया। उस घटना के बाद भी प्रशासन की ओर से सिर्फ औपचारिक बयान ही सामने आए थे। अब बृजेंद्र बिस्वास की हत्या ने यह साफ कर दिया है कि हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से हिंदू समुदाय में भय और असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।
सवालों के घेरे में यूनुस प्रशासन
इन दोनों हत्याओं के बाद सबसे बड़ा सवाल बांग्लादेश के यूनुस प्रशासन की भूमिका को लेकर उठ रहा है। आखिर क्यों एक के बाद एक हिंदू नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है और प्रशासन की प्रतिक्रिया इतनी सुस्त क्यों नजर आ रही है? मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और विस्फोटक हो सकते हैं। बृजेंद्र बिस्वास जैसे सुरक्षाकर्मी की हत्या यह संकेत देती है कि खतरा अब सिर्फ आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि मयमनसिंह से लेकर अन्य इलाकों तक डर का साया लगातार गहराता जा रहा है।
