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जेल में बीमार आजम खान के साथ क्या हो रहा है? बिस्तर-पलंग नहीं, सेहत पर भी सवाल, परिवार का बड़ा खुलासा

रामपुर जिला जेल में बंद सपा नेता आजम खान की तबीयत को लेकर परिवार ने गंभीर चिंता जताई है। पत्नी तंजीम फातिमा ने बिस्तर-पलंग न मिलने और इलाज को लेकर सवाल उठाए। पूरी खबर पढ़ें।

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता आजम खान की जेल में हालत को लेकर एक बार फिर सियासी और मानवीय बहस तेज हो गई है। रामपुर जिला जेल में बंद आजम खान से सोमवार को उनकी पत्नी डॉक्टर तंजीम फातिमा, बड़े बेटे अदीब आजम और बहन निखत अखलाक ने मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पहले से ही आजम खान की तबीयत को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। परिवार से मिलने के बाद जो बातें सामने आईं, उन्होंने जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं और इलाज की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब डेढ़ महीने से सजा काट रहे आजम खान फिलहाल सुरक्षा कारणों और कानूनी प्रक्रिया के तहत बैरक में बंद हैं, जहां उनकी दिनचर्या और स्वास्थ्य दोनों को लेकर चिंता जताई जा रही है।

‘तबीयत में कोई सुधार नहीं’, बुनियादी सुविधाओं पर सवाल

जेल से बाहर निकलने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए डॉक्टर तंजीम फातिमा ने बेहद साफ शब्दों में कहा कि आजम खान की तबीयत में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि शुरू से ही उन्हें बिस्तर या पलंग जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। तंजीम फातिमा के मुताबिक, बीमारी की स्थिति में भी अगर किसी व्यक्ति को आराम की मूलभूत सुविधा न मिले तो उसका असर सीधे स्वास्थ्य पर पड़ता है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या आजम खान को फर्श पर सोना पड़ रहा है, तो उन्होंने कहा कि वह बैरक के अंदर नहीं गई थीं, इसलिए इस पर कुछ भी पुख्ता नहीं कह सकतीं, लेकिन इतना जरूर है कि सुविधाओं की कमी साफ नजर आती है। उनके बयान के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या जेल में एक बीमार कैदी को आवश्यक मानवीय सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।

‘जेल में हर इंसान परेशान रहता है’, बेटे की भावुक प्रतिक्रिया

आजम खान के बड़े बेटे अदीब आजम ने भी पिता से मुलाकात के बाद अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि जेल का माहौल ऐसा होता है कि वहां अच्छे से अच्छा इंसान भी टूट जाता है। अदीब के मुताबिक, जेल में किसी की तबीयत अच्छी रहना अपने आप में बड़ी बात होती है, क्योंकि मानसिक और शारीरिक दबाव लगातार बना रहता है। उन्होंने यह भी बताया कि मुलाकात का समय सीमित था, लेकिन इतने कम समय में भी पिता की सेहत को लेकर उनकी चिंता और बढ़ गई। अदीब आजम के चेहरे पर पिता को लेकर बेचैनी साफ दिख रही थी। उनका कहना था कि जेल तो आखिर जेल होती है, वहां इंसान परेशान ही रहता है, चाहे वह कोई भी हो। इस बयान ने आजम खान की स्थिति को लेकर आम लोगों की सहानुभूति को और गहरा कर दिया है।

इलाज, व्यवस्था और सियासत – तीनों पर उठे सवाल

आजम खान की जेल में हालत अब सिर्फ एक कानूनी या प्रशासनिक मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह मानवीय दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। परिवार की ओर से बार-बार यह बात सामने रखी जा रही है कि इलाज और सुविधाओं में सुधार की जरूरत है। सपा समर्थकों का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है, लेकिन बीमारी की हालत में बुनियादी सुविधाएं देना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। वहीं, जेल प्रशासन की ओर से समय-समय पर यह दावा किया जाता रहा है कि नियमों के तहत आवश्यक चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या जमीनी हकीकत और आधिकारिक दावों में अंतर है। आजम खान की सेहत को लेकर उठ रहे ये सवाल आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं, क्योंकि मामला सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि जेल व्यवस्था और कैदियों के अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है।

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