भरत तिवारी एनकाउंटर केस: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा की सीजेएम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले में आरोपी बनाए गए 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। इनमें तत्कालीन एसडीएम, एसडीपीओ और थानाध्यक्ष समेत पुलिस-प्रशासन से जुड़े कई अधिकारी शामिल हैं। अदालत ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 अगस्त 2026 तक कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद मामले की जांच और कार्रवाई को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट
आरा सीजेएम कोर्ट ने सोमवार को भरत तिवारी एनकाउंटर केस की सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। अदालत ने केस से जुड़े सभी 11 आरोपियों को न्यायालय के सामने पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 अगस्त तक अदालत में पेश किया जाना है। जिन लोगों के खिलाफ वारंट जारी हुआ है, उनमें उस समय के एसडीएम, एसडीपीओ और थानाध्यक्ष के अलावा अन्य अधिकारी और पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इस आदेश को मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। अब पुलिस और संबंधित एजेंसियों के सामने इन सभी आरोपियों को अदालत के सामने पेश करने की जिम्मेदारी है।
परिवार ने लगाया था फर्जी एनकाउंटर का आरोप
भरत तिवारी एनकाउंटर केस को लेकर उनके परिवार ने शुरुआत से ही पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि भरत को साजिश के तहत पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर में मारा। परिवार लगातार इस मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग करता रहा है। मामला बढ़ने के बाद बिहार की राजनीति में भी इस पर बहस शुरू हो गई। विपक्षी नेताओं के साथ-साथ सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेताओं ने भी परिवार से मुलाकात कर उनकी बात सुनी। एनडीए के नेता और सांसद चिराग पासवान समेत कई नेताओं ने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की थी। हाल ही में पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से जीते प्रशांत किशोर भी परिवार से मिलने पहुंचे थे। इससे मामला राजनीतिक तौर पर भी काफी चर्चा में आ गया।
दिल्ली में प्रदर्शन से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
भरत तिवारी एनकाउंटर केस को लेकर परिवार और समर्थकों की ओर से अलग-अलग जगहों पर आवाज उठाई गई है। दिल्ली में प्रदर्शन भी हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इस बीच बिहार पुलिस ने 31 तारीख को एसटीएफ के सिपाही अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि जांच में अक्षय कुमार की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है। आरोप है कि एनकाउंटर के दौरान भरत तिवारी पर पहली गोली अक्षय कुमार ने चलाई थी, जिसके बाद दूसरे पुलिसकर्मियों ने भी फायरिंग की। हालांकि मामले से जुड़े सभी आरोपों और घटनाक्रम पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
17 जून को हुई थी भरत तिवारी की मौत
भरत तिवारी की उम्र करीब 28 साल थी। उनकी मौत 17 जून 2026 को पुलिस एनकाउंटर में हुई थी। यह कार्रवाई भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में स्थित भरत तिवारी के गांव में हुई थी। घटना के बाद से ही परिवार लगातार सवाल उठाता रहा है कि आखिर एनकाउंटर की पूरी घटना किस तरह हुई और इसमें पुलिस अधिकारियों की क्या भूमिका थी। करीब दो महीने बाद भी मामला शांत नहीं हुआ है। अब सीजेएम कोर्ट की ओर से 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने से केस ने नया मोड़ ले लिया है। 12 अगस्त तक आरोपियों की गिरफ्तारी और अदालत में पेशी इस मामले में अगली बड़ी कार्रवाई होगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस किस तरह कार्रवाई करती है और आगे की सुनवाई में क्या सामने आता है।
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