देश की राजधानी दिल्ली का सबसे व्यस्त और सुरक्षित माना जाने वाला इलाका कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर मंगलवार की शाम अचानक गोलियों और नारों की जगह चीख-पुकार से दहल उठा। सीजेपी (CJP) प्रोटेस्ट के नाम पर इकट्ठा हुई भीड़ देखते ही देखते बेकाबू हो गई। शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आड़ में आए उपद्रवियों ने इलाके की शांति को पूरी तरह भंग कर दिया। पुलिस के बार-बार मना करने और क्षेत्र में लागू निषेधाज्ञा (धारा 144) की चेतावनियों को दरकिनार करते हुए प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए। देखते ही देखते गाड़ियों के हॉर्न की जगह पथराव की आवाजें गूंजने लगीं और वहां मौजूद आम लोग और राहगीर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
भीड़ के बीच फंसे जवान की ऐसे बची जान, सरकारी गाड़ियों पर भी बरसाए पत्थर
हिंसा का सबसे भयानक रूप तब देखने को मिला जब उपद्रवियों की भीड़ ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान को अकेले पाकर चारों तरफ से घेर लिया। भीड़ ने जवान के साथ बेहद बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी और स्थिति इतनी नाजुक हो गई कि उसकी जान पर बन आई। हालांकि, मौके की नजाकत को समझते हुए पास में तैनात अन्य आरएएफ जवानों ने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने तुरंत मोर्चा संभालते हुए अपने साथी को उग्र भीड़ के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाला। केवल सुरक्षाकर्मियों पर ही हमला नहीं हुआ, बल्कि उपद्रवियों ने बैरिकेड्स तोड़ डाले और सड़कों पर खड़ी पुलिस व आरएएफ की गाड़ियों पर जमकर पथराव कर उन्हें बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
दिल्ली पुलिस का कड़ा रुख, दर्ज हुईं 10 FIR और ड्रोन नियमों के उल्लंघन पर भी शिकंजा
इस पूरी घटना को दिल्ली पुलिस ने बेहद गंभीरता से लिया है। कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए अब तक अलग-अलग पुलिस थानों में कुल 10 एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली हैं। पीड़ित जवान की शिकायत के आधार पर जानलेवा हमले की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। सबसे ज्यादा 4 मामले संसद मार्ग थाने में, 3 मामले कनॉट प्लेस में, और 1-1 मामला मंदिर मार्ग, बाराखंभा रोड व कर्तव्य पथ थाने में दर्ज हुआ है। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी सख्त धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा, नई दिल्ली जैसे संवेदनशील इलाके में बिना पूर्व अनुमति के ड्रोन उड़ाने के आरोप में भी एक अलग मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
250 से अधिक वीडियो खंगाल रही पुलिस, पूर्व-नियोजित साजिश की भी आशंका
दिल्ली पुलिस की कई विशेष टीमें अब घटना के पीछे की असली वजह और इसमें शामिल चेहरों को बेनकाब करने में जुट गई हैं। पुलिस सोशल मीडिया और सीसीटीवी कैमरों से मिली 250 से भी ज्यादा वीडियो फुटेज का बारीकी से विश्लेषण कर रही है, ताकि भीड़ में शामिल होकर हिंसा भड़काने वाले एक-एक उपद्रवी की सटीक पहचान की जा सके। पुलिस अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि सरकारी काम में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी काम कर रही हैं कि क्या यह पूरी हिंसा किसी बड़ी और पूर्व-नियोजित साजिश का हिस्सा थी या अचानक भड़का हुआ गुस्सा। फिलहाल पुलिस ने आम जनता से शांति और सहयोग बनाए रखने की अपील की है।
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