लखनऊ के चर्चित अलीगंज अग्निकांड मामले में आरोपी सुरेंद्र प्रसाद शुक्ला को बड़ा झटका लगा है। जिला अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। जिला जज मलखान सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और शुरुआती जांच में सामने आए तथ्य उनकी भूमिका की ओर इशारा करते हैं। कोर्ट ने माना कि जिस इमारत में यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसके संचालन में सुरक्षा मानकों और जरूरी नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं। अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी को फिलहाल राहत नहीं मिल सकी है। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था, जब एक भीषण आग में 15 छात्र-छात्राओं की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे।
तीन मंजिला इमारत में लगी आग ने मचा दी थी तबाही
अलीगंज क्षेत्र के पुरनिया बाजार के पास स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में 22 जून को अचानक भीषण आग लग गई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही समय में पूरी इमारत धुएं से भर गई। घटना के दौरान अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाया। जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से 15 छात्रों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। मृतकों के परिजन घटनास्थल पर पहुंचकर अपने बच्चों को बचाने की गुहार लगाते नजर आए थे। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और व्यावसायिक इमारतों में नियमों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
जांच में सामने आए सुरक्षा नियमों की अनदेखी के आरोप
हादसे की जांच के दौरान सामने आया कि जिस इमारत में आग लगी थी, उसके निर्माण और संचालन को लेकर कई सवाल उठे। जांच एजेंसियों के अनुसार इमारत में कैफे और कोचिंग सेंटर जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे थे। आरोप है कि भवन संचालन के दौरान जरूरी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। जांच में इमारत के मालिक सुरेंद्र प्रसाद शुक्ला की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि उपलब्ध दस्तावेज और जांच से जुड़े तथ्य आरोपी की जिम्मेदारी की ओर संकेत करते हैं। इन्हीं तथ्यों को आधार बनाते हुए अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर मामले में आरोपी को राहत देना उचित नहीं होगा।
LDA अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
अलीगंज अग्निकांड के बाद केवल भवन मालिक ही नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों और इंजीनियरों की लापरवाही सामने आने की बात कही गई थी। रिपोर्ट में 19 इंजीनियरों और 6 PCS अधिकारियों की भूमिका की जांच और कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। हादसे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा था कि जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की थी। अब आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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