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प्रशासन ने हटाया धरना, लेकिन नहीं टूटा हौसला! आंदोलनकारियों ने कहा- जान चली जाए, अनशन नहीं छोड़ेंगे

केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे आंदोलन में प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को हटाया, लेकिन आंदोलनकारियों ने अनशन जारी रखने का ऐलान किया। जानिए पूरा मामला आसान भाषा में।

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मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में पिछले 15 दिनों से ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे। रविवार सुबह पुलिस और प्रशासन ने सभी प्रदर्शनकारियों को धरना स्थल से हटा दिया। प्रशासन का कहना है कि लगातार बारिश और नदी का बढ़ता पानी लोगों के लिए खतरा बन रहा था, इसलिए उन्हें सुरक्षित जगह भेजा गया। लेकिन आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने शांतिपूर्ण आंदोलन को जबरन खत्म करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनका अनशन अभी खत्म नहीं हुआ है और वह आखिरी सांस तक इसे जारी रखेंगे। उन्होंने साफ कहा कि वह ड्रिप या ग्लूकोज नहीं लेंगे, सिर्फ पानी और नींबू पानी पीकर अपना अनशन जारी रखेंगे।

प्रदर्शनकारियों की मांग- पहले पूरे करें पुनर्वास के वादे

आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि सरकार ने पहले उन्हें बेहतर मुआवजा और पुनर्वास का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक उन वादों को पूरा नहीं किया गया। इसी वजह से उन्होंने तीन जुलाई से धरना और आमरण अनशन शुरू किया था। आंदोलन में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार और महिलाएं भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को उनका हक नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन चलता रहेगा। अमित भटनागर ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की हुई और प्रदर्शन स्थल पर बनाई गई प्रतीकात्मक चिताओं और अन्य सामान को भी तोड़ दिया गया। हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है।

प्रशासन बोला- लोगों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम

छतरपुर जिला प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को हटाने का फैसला उनकी सुरक्षा को देखते हुए लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, लगातार बारिश से बराना नदी का जलस्तर बढ़ गया था और वहां रहना खतरनाक हो सकता था। प्रशासन ने दावा किया कि किसी पर बल प्रयोग नहीं किया गया और सभी लोगों को समझाकर बसों से उनके गांव भेजा गया। प्रशासन ने यह भी कहा कि विस्थापन पैकेज बढ़ाने के प्रस्ताव को राज्य सरकार ने सिद्धांत रूप से मंजूरी दे दी है और जल्द ही इसका आदेश जारी हो सकता है। इसके बाद पात्र परिवारों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

परियोजना पर सरकार और आंदोलनकारियों की अलग-अलग राय

सरकार का कहना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इससे सिंचाई, पीने का पानी और क्षेत्र के विकास में मदद मिलेगी। वहीं आंदोलनकारी कहते हैं कि विकास जरूरी है, लेकिन जिन लोगों की जमीन और घर इस परियोजना से प्रभावित हो रहे हैं, उन्हें पहले पूरा मुआवजा और सही पुनर्वास मिलना चाहिए। आंदोलनकारियों ने परियोजना में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि अब तक कोई लिखित शिकायत या सबूत नहीं मिला है। अगर कोई प्रमाण दिया जाता है तो उसकी जांच कराई जाएगी। फिलहाल प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच टकराव जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले पर सबकी नजर रहेगी।

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