Azamgarh News: आजमगढ़ के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार को हुई वारदात ने पूरे इलाके को हिला दिया। पुलिस के अनुसार, अरविंद सिंह के घर में पिछले कुछ दिनों से पूजा-पाठ और झाड़-फूंक चल रही थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद हुआ और अरविंद सिंह ने कथित तौर पर घर में रखी पिस्टल से फायरिंग कर दी। गोली लगने से उसकी पत्नी बबिता और पूजा कराने आए दो पंडितों, महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा की मौत हो गई। घटना के बाद अरविंद सिंह ने अपने तीन बच्चों को कमरे में बंद कर लिया और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय उन्हें नुकसान पहुंचाने की धमकी देने लगा। पुलिस के पहुंचने के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। इस दौरान अरविंद सिंह ने अपने 10 वर्षीय बेटे को भी गोली मार दी। घायल बच्चे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
2017 से परिवार पर आईं कई मुसीबतें, मां ने बताए पुराने विवाद
अरविंद की मां शमला देवी ने परिवार के पिछले कई सालों के विवादों का जिक्र करते हुए बताया कि 2017 के बाद से परिवार लगातार मुश्किलों से गुजर रहा था। उनके मुताबिक, उस दौरान अरविंद की पत्नी से दुष्कर्म का मामला सामने आया था, जिसमें परिवार के कुछ रिश्तेदारों पर आरोप लगाए गए थे। इसके बाद अरविंद सिंह के कथित अपहरण और उसे कई महीनों तक बाहर रखे जाने की बात भी परिवार की ओर से कही गई। अगले साल यानी 2018 में अरविंद सिंह के भाई सुनील सिंह उर्फ गुड्डू की हत्या कर दी गई। परिवार ने इन घटनाओं को लेकर अपने रिश्तेदारों पर आरोप लगाए थे और कानूनी कार्रवाई भी हुई थी। इन पुराने विवादों का असर परिवार पर लंबे समय तक बना रहा। हालांकि इन घटनाओं से जुड़े आरोपों और मामलों की वास्तविक कानूनी स्थिति संबंधित जांच और अदालत के रिकॉर्ड से ही तय होगी।
‘प्रेत बाधा’ की बात के बाद घर में शुरू हुई पूजा
अरविंद सिंह की मां के अनुसार, लगातार हुई घटनाओं के बाद अरविंद मानसिक तनाव से गुजर रहा था। परिवार का दावा है कि 2019 के बाद उसकी हालत को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इसी दौरान एक पंडित ने परिवार को बताया कि अरविंद पर कथित तौर पर ‘प्रेत बाधा’ है और उसके दिवंगत भाई की आत्मा उसे परेशान कर रही है। इसके बाद घर में कई दिनों तक पूजा-पाठ और झाड़-फूंक कराई जा रही थी। मंगलवार को भी घर में इसी तरह की धार्मिक प्रक्रिया चल रही थी। बताया जा रहा है कि इसी दौरान अरविंद ने पंडितों से उनके पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे। इसी बात को लेकर कहासुनी हुई और देखते ही देखते मामला गोलीबारी तक पहुंच गया। हालांकि ‘प्रेत बाधा’ से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच में वारदात के वास्तविक कारणों को अलग से देखा जा रहा है।
बच्चों को बनाया बंधक, बेटे की मौत के बाद एनकाउंटर में मारा गया आरोपी
गोलीबारी के बाद अरविंद सिंह ने खुद को बच्चों के साथ कमरे में बंद कर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस और ATS की टीम मौके पर पहुंची और उसे बाहर आने के लिए कहा गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अंदर से फायरिंग की और आत्मसमर्पण नहीं किया। इसी दौरान उसके बेटे को गोली लगी, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। बाद में सुरक्षा बलों ने कमरे में प्रवेश किया। पुलिस के अनुसार, अरविंद ने टीम पर भी गोली चलाई, जिसके जवाब में हुई फायरिंग में वह गंभीर रूप से घायल हुआ और उसकी मौत हो गई। इस पूरी घटना के बाद घर में उसकी दो बेटियां और मां रह गई हैं। पुलिस अब गोलीबारी की वजह, हथियार के स्रोत, पूजा कराने वाले लोगों की भूमिका और परिवार के पुराने विवादों समेत पूरे मामले की जांच कर रही है।
