Lucknow News: उत्तर प्रदेश के चर्चित अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव को लेकर लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब 27 साल पुराने पांच करोड़ रुपये की रंगदारी और धमकी देने के मामले में अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया है। आरोप था कि नैनी जेल में बंद रहने के बावजूद बबलू कारोबारियों को फोन पर धमकाकर रंगदारी मांगता था। लेकिन इतने लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद भी सीबीआई आरोपों को पुख्ता सबूतों के साथ साबित नहीं कर सकी।
पांच करोड़ की रंगदारी मामले में बबलू श्रीवास्तव को राहत
लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव को करीब 27 साल पुराने मामले में बरी कर दिया है। इस केस में आरोप लगाया गया था कि प्रयागराज की नैनी जेल में बंद रहने के दौरान वह फोन के जरिए कारोबारियों को धमकाता था और उनसे पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगता था। सीबीआई का दावा था कि जेल में रहते हुए भी वह अपने गिरोह के सदस्यों के माध्यम से आपराधिक गतिविधियां चला रहा था। हालांकि, अदालत में अभियोजन पक्ष इन आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा।
51 गवाहों के बावजूद नहीं मिले ठोस सबूत
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत में कुल 51 गवाह पेश किए थे। इनमें से 13 गवाह अपने पुराने बयानों से पलट गए। जिन कारोबारियों को धमकी मिलने की बात कही गई थी, वे भी अदालत में आरोपी की पहचान नहीं कर सके। एक कारोबारी ने फोन पर सुनाई दी आवाज को बबलू की आवाज मानने से इनकार किया। इसके अलावा धमकी देने में इस्तेमाल मोबाइल और सिम कार्ड भी बरामद नहीं हुए। आवाज का वैज्ञानिक मिलान भी नहीं कराया गया था। इन कमियों के चलते अदालत को आरोप साबित करने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले और बबलू को दोषमुक्त कर दिया गया।
1999 में शुरू हुई थी CBI जांच, 2001 में दाखिल हुई चार्जशीट
इस मामले की जांच वर्ष 1999 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई को सौंपी गई थी। एजेंसी ने 24 फरवरी 1999 को मुकदमा दर्ज किया था। जांच पूरी करने के बाद 9 अक्टूबर 2001 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। अक्टूबर 2003 में आरोपी के खिलाफ आरोप तय हुए थे। इसके बाद करीब दो दशक से अधिक समय तक मुकदमे की सुनवाई चलती रही। आखिरकार अदालत ने उपलब्ध सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर अपना फैसला सुनाया।
बरी होने के बाद भी जेल में रहेगा बबलू श्रीवास्तव
इस मामले में बरी होने के बावजूद बबलू श्रीवास्तव की जेल से रिहाई नहीं होगी। वह पूर्व अतिरिक्त सीमा शुल्क कलेक्टर एलडी अरोड़ा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। वर्ष 2008 में कानपुर की अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी 2011 में इस सजा को बरकरार रखा था। नवंबर 2024 में उसकी समयपूर्व रिहाई की मांग भी खारिज हो चुकी है। फिलहाल वह बरेली सेंट्रल जेल में बंद है।
