गाजियाबाद की वसुंधरा पुलिस चौकी में हुए धमाके ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के समय चौकी और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। ऐसे में पुलिस के लिए यह पता लगाना चुनौती बन गया है कि धमाका कैसे हुआ और इसके पीछे कौन लोग हो सकते हैं। इस मामले ने यूपी पुलिस के महत्वाकांक्षी ऑपरेशन त्रिनेत्र की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस चौकी में धमाके से मचा हड़कंप
6 नवंबर की रात करीब 9 बजे इंदिरापुरम थाना क्षेत्र की वसुंधरा पुलिस चौकी में अचानक विस्फोट हुआ। धमाके की आवाज से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। चौकी की दो खिड़कियों के शीशे टूट गए और उनमें दरारें आ गईं। घटना के वक्त चौकी के अंदर पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन उन्हें कोई चोट नहीं आई। हालांकि, वहां से गुजर रहे एक डिलीवरी बॉय के सिर में कांच का टुकड़ा लग गया। उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के बाद उसकी हालत ठीक बताई गई।
CCTV बंद होने से जांच में बढ़ी मुश्किल
इस घटना की जांच में सबसे बड़ी परेशानी सीसीटीवी फुटेज नहीं मिलना है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, चौकी के अंदर और आसपास के कुछ कैमरे काम नहीं कर रहे थे। एलिवेटेड रोड के आसपास लगे कैमरों को भी बदला जा रहा था। ऐसे में संदिग्धों की आवाजाही और घटना के समय उनकी गतिविधियों का पता लगाने में दिक्कत आ रही है। अब सवाल उठ रहा है कि जब संवेदनशील पुलिस चौकी पर ही कैमरे बंद थे, तो सुरक्षा निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
ऑपरेशन त्रिनेत्र की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
यूपी पुलिस ने अपराध रोकने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। इस योजना का उद्देश्य पुलिस को तकनीकी निगरानी के जरिए मदद पहुंचाना था। लेकिन वसुंधरा चौकी ब्लास्ट के बाद कैमरों के काम न करने की बात सामने आने से इस व्यवस्था की देखरेख पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह भी जांच का विषय है कि कैमरे कब से बंद थे और उन्हें समय रहते ठीक क्यों नहीं कराया गया।
संगठन के नाम से वायरल पोस्ट, पुलिस ने नहीं की पुष्टि
धमाके के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें तहरीक-ए-मुजाहिदीन-ए-हिन्दुस्तान नाम के संगठन ने कथित तौर पर घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। पोस्ट में पुलिस को निशाना बनाने और आगे भी कार्रवाई जारी रखने जैसी बातें लिखी गई हैं। हालांकि, गाजियाबाद पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। डीसीपी रिजुल कुमार के मुताबिक, बम स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीम ने मौके से नमूने जुटाकर जांच के लिए भेजे हैं। फिलहाल धमाके की असली वजह और इसके पीछे जिम्मेदार लोगों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
