दक्षिण अमेरिकी देश पैराग्वे में एक बैंक का वित्तीय संकट देखते ही देखते सरकार के पतन की वजह बन गया। डिजिटल बैंक यूएनो (Ueno Bank) पर केंद्रीय बैंक की कार्रवाई के बाद करीब 30 लाख ग्राहकों की जमा रकम तक पहुंच रुक गई। इस घटना ने देशभर में लोगों का गुस्सा बढ़ा दिया। राजधानी असुनसियोन समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए। मामला तब और गंभीर हो गया, जब बैंक के मालिकों और राष्ट्रपति सैंटियागो पेना के पुराने कारोबारी संबंध सामने आए। पेना वर्ष 2025 तक उस कारोबारी समूह में हिस्सेदार थे, जिसके नियंत्रण में यूएनो बैंक था। इसके बाद विपक्ष ने राष्ट्रपति पर बैंक को अनुचित फायदा पहुंचाने और सरकारी व्यवस्था का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगाए।
महाभियोग से पहले राष्ट्रपति ने दिया था इस्तीफे का प्रस्ताव
बैंक संकट को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच सैंटियागो पेना ने गुरुवार को राष्ट्रपति पद छोड़ने की पेशकश की थी। हालांकि, सांसदों ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने के बजाय महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। उन पर हितों के टकराव, सरकारी धन के इस्तेमाल में गड़बड़ी, पेंशन फंड से जुड़े नियमों की अनदेखी और बैंक के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई को प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। संसद में यह भी सवाल उठाया गया कि सरकारी संस्थाओं ने बैंक की संदिग्ध कर्ज गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। शुक्रवार को सीनेट में महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान हुआ, जिसमें मौजूद 45 में से 44 सांसदों ने पेना को पद से हटाने का समर्थन किया। खास बात यह रही कि उनकी अपनी पार्टी के सांसदों ने भी उनके खिलाफ वोट दिया। हालांकि, पेना ने सभी आरोपों को खारिज किया है।
पद से हटते ही घर में नजरबंद, जांच के घेरे में पूर्व राष्ट्रपति
महाभियोग प्रस्ताव पारित होने के कुछ ही मिनट बाद अधिकारियों ने पूर्व राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उनके खिलाफ विश्वासघात, प्रभाव के दुरुपयोग और सरकारी धन के कथित गलत इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है। उनसे पूछताछ की भी तैयारी है। इस कार्रवाई के बाद पेना को राष्ट्रपति पद से मिलने वाली कानूनी सुरक्षा भी नहीं रही। जांच का एक अहम हिस्सा यूएनो बैंक में सरकारी धन जमा कराने से जुड़ा है। आरोप है कि राज्य के सामाजिक सुरक्षा और पेंशन संस्थान के करीब 355 मिलियन डॉलर बैंक में जमा थे, जो निर्धारित सीमा से अधिक बताए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में किन अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका थी। फिलहाल इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला आना बाकी है।
पेद्रो अलियाना बने नए राष्ट्रपति, जमाकर्ताओं को पैसे लौटाना सबसे बड़ी चुनौती
सैंटियागो पेना की विदाई के बाद उपराष्ट्रपति पेद्रो अलियाना ने राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाल ली है। वह अगस्त 2028 तक देश की कमान संभालेंगे। शपथ लेने के बाद उन्होंने बैंक संकट से प्रभावित लोगों को उनकी रकम वापस दिलाने का भरोसा दिया। हालांकि, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती करीब 30 लाख ग्राहकों का भरोसा दोबारा जीतने की है। यूएनो बैंक की वित्तीय स्थिति खराब होने के बाद केंद्रीय बैंक ने उसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। शुरुआती जांच में बैंक की पूंजी, कर्ज देने के तरीकों और मालिकों से जुड़ी कंपनियों के लेनदेन पर कई सवाल उठे हैं। बैंक के कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि नई सरकार जमाकर्ताओं का पैसा कब तक वापस दिला पाती है और पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं।
