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जंतर-मंतर पहुंचीं डिंपल यादव, छात्र आंदोलन के समर्थन में सरकार से की बड़ी मांग

सपा सांसद डिंपल यादव ने CJP के छात्र आंदोलन और सोनम वांगचुक के समर्थन में संसद से जंतर-मंतर तक पैदल मार्च किया। जानिए छात्र आंदोलन, परीक्षा सुधार की मांग और विपक्ष के रुख से जुड़ी पूरी खबर।

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संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन राजधानी दिल्ली में छात्र आंदोलन ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया। परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के ‘चलो संसद’ मार्च के बीच समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव (Dimple Yadav)  भी समर्थन में उतर आईं। उन्होंने पार्टी के अन्य सांसदों के साथ संसद परिसर से जंतर-मंतर तक पैदल मार्च किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश के लाखों छात्र अपनी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन उनकी आवाज़ को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा। डिंपल यादव ने अपील की कि सरकार आंदोलन कर रहे छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत का रास्ता अपनाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके। उनके इस कदम ने छात्र आंदोलन को नया राजनीतिक समर्थन दे दिया है।

सोनम वांगचुक के समर्थन में विपक्ष ने दिखाई एकजुटता

डिंपल यादव (Dimple Yadav) ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की बात कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संवाद करने के बजाय आंदोलन को नजरअंदाज कर रही है। उनके अनुसार, परीक्षा में बार-बार सामने आ रहे विवाद और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र मेहनत करते हैं, इसलिए उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। सपा सांसदों ने भी सरकार से अपील की कि आंदोलन को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी जाए। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में बातचीत सबसे बेहतर रास्ता होता है और सरकार को इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

 क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें?

CJP और छात्र संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की मांग को लेकर चल रहा है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए। इसी उद्देश्य से संसद सत्र के पहले दिन ‘चलो संसद’ मार्च का आयोजन किया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और विभिन्न राज्यों से आए युवा शामिल हुए। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार तक अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाना है ताकि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय लिया जा सके।

छात्र आंदोलन पर बढ़ी सियासत, आगे क्या होगा?

डिंपल यादव (Dimple Yadav) के मार्च में शामिल होने के बाद छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पिछले कुछ दिनों में कई विपक्षी नेता जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन जता चुके हैं। विपक्ष का कहना है कि छात्रों के मुद्दों पर संसद के भीतर भी चर्चा होनी चाहिए। दूसरी ओर सरकार की ओर से अब तक आंदोलन को लेकर सीमित प्रतिक्रिया सामने आई है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार आंदोलनकारियों से औपचारिक बातचीत शुरू करेगी या फिर यह विरोध प्रदर्शन आगे और बड़ा रूप लेगा। फिलहाल इतना साफ है कि छात्रों के मुद्दे अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि संसद और राष्ट्रीय राजनीति का भी अहम विषय बन चुके हैं।

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