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अमित शाह से अचानक क्यों मिले धर्मेंद्र प्रधान? CJP के प्रदर्शन और इस्तीफे की मांग के बीच बढ़ी सियासी हलचल

CJP के संसद मार्च और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। जानिए बैठक, छात्र आंदोलन और सरकार के रुख से जुड़ी पूरी जानकारी।

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नीट (NEET) पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसी बीच दोनों वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे। हालांकि इस बैठक का एजेंडा क्या था और किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। न तो सरकार की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई बयान जारी किया गया है और न ही इस्तीफे से जुड़ी अटकलों की पुष्टि हुई है। ऐसे में इस बैठक को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

जंतर-मंतर से संसद तक प्रदर्शन

सोमवार को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही CJP ने ‘संसद मार्च’ का आयोजन किया। बड़ी संख्या में छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और समर्थक जंतर-मंतर से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी। शास्त्री भवन के पास कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान कुछ स्थानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और बल प्रयोग की खबरें भी सामने आईं। वहीं, सुरक्षा कारणों से जनपथ, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक, राजीव चौक और सेवा तीर्थ जैसे कई मेट्रो स्टेशनों के कुछ प्रवेश द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

इस्तीफे की मांग के बीच आंदोलन में आया नया मोड़

CJP और आंदोलन से जुड़े कई छात्र संगठन लंबे समय से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामलों पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। इसी आंदोलन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और CJP संस्थापक अभिजीत दीपके भी भूख हड़ताल पर बैठे थे। सोमवार को दोनों नेताओं ने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला किया। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी मांगें अभी भी बरकरार हैं और आगे की रणनीति सरकार के रुख पर निर्भर करेगी। हालांकि सरकार की ओर से इस्तीफे या मांगों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

बातचीत के दावों के बीच आगे की रणनीति पर नजर

CJP ने यह दावा भी किया है कि पहली बार केंद्र सरकार की ओर से बातचीत की पहल की गई है। संगठन का कहना है कि उसके प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की प्रक्रिया शुरू हुई है। हालांकि सरकार ने अभी तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच औपचारिक बातचीत किस स्तर पर हुई और उसका क्या परिणाम निकला। दूसरी ओर, संसद के मानसून सत्र में विपक्ष भी पेपर लीक और छात्र आंदोलन का मुद्दा लगातार उठा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा होती है। फिलहाल अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

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