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कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर खोला मोर्चा, सरकार के सामने रखी यें 5 मागें

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठी। परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदर्शनकारियों ने 5 प्रमुख मुद्दे रखे। जानिए पूरी खबर आसान शब्दों में।

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर बड़ा प्रदर्शन हुआ। यह प्रदर्शन CJP संगठन की ओर से किया गया, जिसमें संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नेतृत्व किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और अभिभावक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। उनका कहना था कि देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और कई बार पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ, लेकिन नारेबाजी और मांगों ने माहौल को काफी गंभीर बना दिया।

प्रदर्शन में उठी परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग

प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग मुद्दे सामने रखे। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ एक दिन का नहीं है, बल्कि लंबी लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उठाई जा रही आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बहुत जरूरी है। NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए विवादों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। उनका कहना था कि जब तक सिस्टम में सुधार नहीं होगा, तब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा।

प्रदर्शन में रखी गई 5 प्रमुख मांगें

इस प्रदर्शन में सिर्फ इस्तीफे की मांग ही नहीं उठाई गई, बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें भी सामने आईं। पहली मांग थी कि डिजिटल शिक्षा और परीक्षा प्रणाली लागू करने से पहले शिक्षकों और संस्थानों को सही प्रशिक्षण दिया जाए। दूसरी मांग मणिपुर जैसे राज्यों में शिक्षा व्यवस्था को सामान्य करने की थी, जहां हालात लंबे समय से प्रभावित हैं। तीसरी मांग प्रतियोगी परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता और पेपर लीक पर सख्त रोक लगाने की थी। चौथी मांग छात्रों और अभिभावकों की समस्याओं को नीति स्तर पर सुनने की थी। पांचवीं और आखिरी मांग मानसिक स्वास्थ्य को लेकर थी, जिसमें कहा गया कि परीक्षा तनाव के कारण छात्रों पर बढ़ते दबाव को गंभीरता से लिया जाए।

युवाओं की भारी भागीदारी और अलग-अलग आवाजें

इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए, जिनमें छात्र, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी और कुछ अभिभावक भी थे। कई प्रदर्शनकारी अनोखे अंदाज में, जैसे मास्क पहनकर और फूल लेकर पहुंचे। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में हो रही समस्याओं ने उनके भविष्य को प्रभावित किया है। कुछ छात्रों ने कहा कि लगातार पेपर लीक और विवादों के कारण उनकी मेहनत पर असर पड़ा है। वहीं, कुछ प्रतिभागियों ने मानसिक तनाव को भी बड़ा मुद्दा बताया और कहा कि कई छात्र दबाव में गलत कदम तक उठा रहे हैं।

इस्तीफे की मांग के साथ बढ़ा विवाद

प्रदर्शन के दौरान “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे। प्रदर्शनकारियों ने NEET पेपर लीक, CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली और अन्य परीक्षा संबंधी मुद्दों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तुरंत सामने नहीं आई। यह प्रदर्शन अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग इसके समर्थन और विरोध में अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। फिलहाल, यह मामला शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बहस को और तेज कर रहा है।

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