महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आने की संभावना है। शिवसेना (UBT) से जुड़े 6 सांसदों को लेकर अटकलें तेज हैं कि वे जल्द ही अपना रुख सार्वजनिक कर सकते हैं। माना जा रहा है कि ये सभी सांसद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी से अलग होने का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं। यह पूरा घटनाक्रम Shiv Sena (UBT) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को “ऑपरेशन टाइगर” नाम दिया जा रहा है, जिससे महाराष्ट्र की सियासत में भारी हलचल मची हुई है।
अलग-अलग शहरों से मुंबई पहुंचे सांसद
सूत्रों के अनुसार, ये सभी 6 सांसद अलग-अलग शहरों से मुंबई पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि दो सांसद चेन्नई, दो कोलकाता, एक पुणे और एक मुंबई में पहले से मौजूद है। ये सभी मिलकर पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें वे लोकसभा स्पीकर को दिए गए पत्र और अपनी राजनीतिक स्थिति से जुड़े दस्तावेज भी सार्वजनिक कर सकते हैं। इन सांसदों में नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे के नाम सामने आ रहे हैं। इस घटनाक्रम से महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।
शिंदे गुट में जाने की अटकलें तेज
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, इन बागी सांसदों की मुलाकात महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख Eknath Shinde से भी हो सकती है। माना जा रहा है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ये सांसद शिंदे गुट में शामिल होने का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी सांसद ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इस संभावित बदलाव को महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े सत्ता संतुलन परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में संसद और राज्य दोनों स्तर पर असर डाल सकता है।
दलबदल कानून और सदस्यता रद्द होने की स्थिति पर नजर
इस पूरे मामले को लेकर शिवसेना (UBT) ने पहले ही इन सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, क्योंकि वे पार्टी बैठकों से अनुपस्थित रहे थे। पार्टी अब उनकी सदस्यता रद्द कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा सकती है। दूसरी ओर, बताया जा रहा है कि ये सांसद पहले ही लोकसभा स्पीकर को पत्र देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं, जिससे दलबदल कानून के तहत स्थिति जटिल हो सकती है। इस बीच महाराष्ट्र इंटेलिजेंस ने इन सांसदों की सुरक्षा भी बढ़ा दी है। अब सभी की नजर इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी है, जो तय करेगी कि महाराष्ट्र की राजनीति में “ऑपरेशन टाइगर” वास्तव में कितना बड़ा बदलाव लाता है।
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