द्रमुक (DMK) नेता और तमिलनाडु के पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन इन दिनों एक बड़े राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। अभिनेत्री तृषा को लेकर दिए गए एक विवादित बयान के सिलसिले में मंगलवार को चेन्नई स्थित उनके आवास से पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था, जिसके बाद उन्हें पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए सड़क मार्ग से तंजावुर ले जाया गया। हालांकि, कानूनी औपचारिकताओं के बाद उसी दिन उन्हें रिहा भी कर दिया गया। रिहाई के तुरंत बाद उदयनिधि सीधे अपने पिता और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मिलने पहुंचे, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी के साथ भव्य स्वागत किया। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है और विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के बीच भी जुबानी जंग तेज हो गई है।
आतंकियों जैसा बर्ताव करने का आरोप
रिहाई के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उदयनिधि स्टालिन ने पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके साथ ऐसा बर्ताव किया गया मानो वे कोई आम नागरिक नहीं बल्कि कोई बड़े आतंकवादी हों। उदयनिधि ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि करीब 3,000 पुलिसकर्मियों के भारी पहरे के बीच उन्हें चेन्नई से तंजावुर तक लगभग 400 किलोमीटर का लंबा सफर सड़क मार्ग से तय कराया गया। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके साथ मानवीय और उचित व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे एक ‘सर्कस कैंप’ की संज्ञा दी और दो टूक कहा कि वह इस तरह के झूठे मुकदमों और पुलिसिया कार्रवाई से डरने वाले बिल्कुल नहीं हैं।
‘डबल मीनिंग’ बयान पर सफाई
अपने ऊपर लगे ‘डबल मीनिंग’ (द्विअर्थी) टिप्पणी के आरोपों पर सफाई देते हुए उदयनिधि ने स्पष्ट किया कि उनके मूल भाषण को जानबूझकर काट-छांट कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके भाषण के कुछ हिस्सों को अलग करके यह दुष्प्रचार किया गया कि उन्होंने कोई आपत्तिजनक बात कही है। असल में, वह तमिलनाडु के किसानों के लिए कावेरी नदी का पानी छोड़े जाने की पुरजोर मांग कर रहे थे और उनका बयान पूरी तरह से किसानों के हक में था। उन्होंने अफसोस जताया कि कुछ राजनीतिक सहयोगियों ने भी बिना पूरे संदर्भ को समझे और बिना सच्चाई जाने उनकी आलोचना करना शुरू कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों की फसलों और उनकी आजीविका के लिए पानी की जरूरत ही उनके इस भाषण का एकमात्र और सीधा उद्देश्य था।
राजनीतिक विरोधियों को दो टूक
महिलाओं के सम्मान को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि उनका इरादा कभी भी किसी का अपमान करने का नहीं था। उन्होंने बेहद भावनात्मक अंदाज में कहा कि तमिलनाडु की हर एक मां और बहन उनके अपने परिवार का हिस्सा है, और वह महिलाओं का हमेशा से सर्वोच्च सम्मान करते आए हैं। उन्होंने विरोधियों को चुनौती देते हुए कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं लेकिन जनता सब जानती है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर से दक्षिण की राजनीति में कावेरी जल विवाद, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक बयानों के नफे-नुकसान को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
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