राजस्थान के उदयपुर में सरकारी स्कूलों की सुविधाओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना अभियान तेज किया है। पार्टी की ओर से चलाए जा रहे ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत रविवार को राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आदिवासी इलाकों के कुछ सरकारी स्कूलों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं, पढ़ाई के माहौल और मिड-डे मील की व्यवस्था को देखा। CJP का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में कई जगह बुनियादी सुविधाओं को लेकर समस्याएं सामने आ रही हैं। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर स्कूलों की जमीनी स्थिति सामने लाने का दावा कर रही है।
चावल को देखकर रुके रांका, सामने आई ये बात
स्कूल के निरीक्षण के दौरान मिड-डे मील के लिए रखे गए चावल भी देखे गए। CJP के मुताबिक, चावल में कंकर दिखाई दिए। इस पर आशुतोष रांका ने स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाया। उन्होंने इस पूरे मामले का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। वीडियो के साथ उन्होंने सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल करते हुए पूछा कि क्या वे अपने बच्चों को ऐसी व्यवस्था वाले स्कूल में भेजना चाहेंगे या यहां तैयार होने वाला भोजन उन्हें खिलाएंगे। रांका ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए।
स्कूलों की हालत को लेकर सरकार पर निशाना
आशुतोष रांका ने आदिवासी इलाकों के सरकारी स्कूलों में मौजूद सुविधाओं को लेकर राजस्थान सरकार पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर माहौल और अच्छी गुणवत्ता का भोजन मिलना जरूरी है। CJP की ओर से स्कूलों में भोजन, पानी, भवन और दूसरी जरूरी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं। पार्टी का दावा है कि उसका अभियान केवल किसी एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने लाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान के पीछे क्या है मकसद?
CJP ने ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान के जरिए आदिवासी बहुल क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने लाने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। उदयपुर क्षेत्र में स्कूलों के दौरे के दौरान सामने आई कमियों को लेकर पार्टी सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रही है। अब मिड-डे मील के चावल में कंकर मिलने का मामला सामने आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, चावल की गुणवत्ता को लेकर सामने आए दावे पर संबंधित स्कूल या प्रशासन की ओर से कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया इस इनपुट में उपलब्ध नहीं है।
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