उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का रहने वाला 21 वर्षीय बादल बाबू इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन वजह बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली है। दिल्ली की एक मामूली फैक्ट्री में सिलाई का काम करने वाला बादल सितंबर 2024 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए पाकिस्तान की एक लड़की के इश्क में ऐसा गिरफ्तार हुआ कि उसने कानून और देश की सीमाओं की भी परवाह नहीं की। लाहौर स्थित बहाउद्दीन मंडी की रहने वाली सना रानी से उसकी ऑनलाइन दोस्ती धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गई। इश्क का ऐसा बुखार चढ़ा कि महज 19 साल की उम्र में बिना किसी वैध पासपोर्ट और वीजा के बादल अवैध तरीके से सरहद पार कर पाकिस्तान जा पहुंचा, जहां उसका यह कदम उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुआ।
एक साल की सजा और अब गंभीर बीमारी का संकट
पाकिस्तान की सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करने के जुर्म में वहां की अदालत ने बादल को एक साल की कैद की सजा सुनाई थी। लाहौर की कुख्यात कोट लखपत जेल में अपनी सजा पूरी करने के बाद वर्तमान में उसे एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। लेकिन उसकी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं; जेल और डिटेंशन सेंटर की प्रताड़ना के बीच बादल अब गंभीर किडनी की बीमारी की चपेट में आ चुका है। शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो चुका बादल अब अपनी जान बचाने के लिए भारत सरकार से लगातार गुहार लगा रहा है, ताकि उसे जल्द से जल्द वतन वापस लाया जा सके।
परिवार की बेबसी और लंदन से आई मसीहा बनी मदद
अलीगढ़ में रह रहे बादल के माता-पिता को इस बात का दूर-दूर तक अंदाजा नहीं था कि उनका बेटा जो दिल्ली में मेहनत-मजदूरी कर रहा है, वह अचानक पाकिस्तान पहुंच जाएगा। जब परिजनों को इस घटना की जानकारी मिली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और वे लगातार स्थानीय जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि, इस बीच लंदन में रहने वाली पूनम नाम की एक दयालु महिला ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए लाहौर की जेल में बंद बादल की कानूनी मदद के लिए स्थानीय वकील से संपर्क किया और अपनी तरफ से आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई, जिससे परिवार को थोड़ी राहत जरूर मिली है।
भारत सरकार से वतन वापसी की लगाई गुहार
बादल के पिता कृपाल सिंह ने बताया कि उनके परिवार में तीन बेटे और एक बेटी है, जिनमें बादल सबसे छोटा और अविवाहित है। बेटे की इस हालत ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि अब भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास (एम्बेसी) को आधिकारिक पत्र भेजे जाने के बाद ही बादल की डिटेंशन सेंटर से रिहाई और भारत वापसी का रास्ता साफ हो सकेगा। अब बुजुर्ग माता-पिता की बस यही एक अंतिम आस है कि देश की सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और उनके बीमार बेटे को सुरक्षित भारत वापस ले आए।
Read more-दो साल पहले प्रेमी के साथ छोड़ दिया था घर, अब ट्रॉली बैग में मिली ऐसी हालत कि हर कोई रह गया सन्न
