संसद के मानसून सत्र में सोमवार को एक बार फिर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के विरोध के कारण लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। इसी बीच शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे। संसद परिसर में मीडिया ने उनसे इस्तीफे, एंटी पेपर लीक बिल और विपक्ष के आरोपों को लेकर कई सवाल पूछे, लेकिन उन्होंने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। वह बिना कोई टिप्पणी किए सीधे आगे बढ़ गए। उनके इस रुख ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। विपक्ष लगातार सरकार को शिक्षा और पेपर लीक के मुद्दे पर घेर रहा है, जबकि सरकार इस मामले में नया कानून लाने की तैयारी में है।
एनडीए सांसदों ने किया गर्मजोशी से स्वागत
धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने पर एनडीए के सांसदों ने उनका स्वागत किया। सांसदों ने उन्हें मिथिला की पारंपरिक पाग पहनाकर सम्मानित किया और फिर उनके साथ संसद भवन के अंदर गए। दूसरी ओर, लोकसभा में विपक्ष का हंगामा जारी रहा। शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही लगातार प्रभावित होती रही। हालात को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही तीसरी बार स्थगित कर दी। उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष आपस में बातचीत कर सहमति बनाने की कोशिश करें, ताकि शाम पांच बजे के बाद सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके और जरूरी विषयों पर चर्चा हो सके।
अब सभी की नजर सरकार और विपक्ष की अगली रणनीति पर
संसद में जारी गतिरोध के बीच राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। एक ओर सरकार एंटी पेपर लीक बिल समेत अपने विधायी कामकाज को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहा है। धर्मेंद्र प्रधान की चुप्पी और संसद में उनका स्वागत भी दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है या आने वाले दिनों में भी संसद की कार्यवाही इसी तरह बाधित रहती है। फिलहाल सभी की नजर शाम की बैठक और आगे की संसदीय रणनीति पर टिकी हुई है।
