बिहार में नई सरकार के गठन से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल को नई सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इससे पहले ही विपक्ष ने सत्ता परिवर्तन को लेकर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखा बयान देते हुए इसे लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करने वाला बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जनता द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री को हटाकर नया चेहरा लाया जा रहा है, जिससे राजनीतिक असंतोष बढ़ता दिख रहा है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है कि क्या यह बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है या किसी बड़े राजनीतिक समझौते का परिणाम।
कांग्रेस का आरोप – ‘थोपा हुआ मुख्यमंत्री’
बिहार कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि राज्य को एक “थोपा हुआ मुख्यमंत्री” मिलने जा रहा है, जिसका नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसे जनता के जनादेश का अपमान बताया। राठौड़ ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम संविधान और लोकतंत्र की भावना के विपरीत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि यह बदलाव राजनीतिक दबाव में लिया गया फैसला है। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है और सत्ता बनाम विपक्ष की जंग और तीखी होती जा रही है।
नीतीश आवास पर हलचल तेज – नए चेहरे को लेकर मंथन जारी
इधर, पटना में मुख्यमंत्री आवास पर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं। सुबह से ही बड़े नेताओं का आना-जाना जारी है, जिससे साफ है कि नई सरकार को लेकर अंतिम रणनीति पर मंथन चल रहा है। जानकारी के अनुसार जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय झा, ललन सिंह और विजय कुमार चौधरी जैसे नेता लगातार बैठकों में शामिल हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर भी बातचीत कर रहे हैं और उन्हें सरकार में शामिल होने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अभी तक निशांत कुमार की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है और वह फिलहाल सरकार में शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं।
नेतृत्व को लेकर सस्पेंस कायम
बिहार की नई सरकार में मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर अभी भी पूरी तरह से स्थिति साफ नहीं हो पाई है, जिससे राजनीतिक सस्पेंस बना हुआ है। एनडीए के भीतर दो-तीन नामों को लेकर चर्चा जारी है और अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाना बाकी है। दूसरी ओर, विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र और संविधान से जोड़कर लगातार सवाल उठा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले 24 से 48 घंटे बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम हो सकते हैं, क्योंकि इसी दौरान नए मुख्यमंत्री का नाम सामने आने की संभावना है। इस बीच सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है, लेकिन सियासी बयानबाजी ने माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है।
