उत्तर प्रदेश के महोबा में शुक्रवार को उस समय राजनीतिक और धार्मिक हलचल तेज हो गई, जब ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ माता को लेकर बड़ा बयान दिया। मां चंडिका देवी मंदिर पहुंचे शंकराचार्य ने पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि देशभर में अब गाय को केवल एक पशु नहीं बल्कि ‘माता’ के रूप में स्वीकार करने की मांग तेज हो चुकी है। उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से निकाली जा रही गौ यात्रा का खुलकर समर्थन किया और कहा कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा अभियान है। शंकराचार्य ने कहा कि इस यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं और गाय के सम्मान से जुड़े संकल्पों को स्वीकार कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद महोबा से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा शुरू हो गई है। खास बात यह रही कि उन्होंने बिना किसी राजनीतिक दल का नाम लिए सत्ता पक्ष पर भी तीखा कटाक्ष किया।
‘देश का हर वर्ग बोल रहा, सिर्फ BJP चुप क्यों?’
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने बयान में कहा कि आज देश के अलग-अलग हिस्सों से गाय को ‘राष्ट्र माता’ घोषित करने की मांग उठ रही है। उन्होंने दावा किया कि समाज का लगभग हर वर्ग इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद कर रहा है, लेकिन सत्ताधारी दल के नेता इस विषय पर खुलकर कुछ नहीं बोल रहे। उन्होंने कहा कि अगर देश की जनता गाय को माता मानती है, तो सरकार को भी जनता की भावना का सम्मान करना चाहिए। शंकराचार्य ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब लोकतंत्र में बहुमत की राय को महत्व दिया जाता है, तो फिर गाय को राष्ट्र माता घोषित करने में सरकार को आपत्ति क्यों है? उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी जीव को केवल जानवर मान लिया जाता है, तो समाज का व्यवहार भी उसके प्रति वैसा ही हो जाता है। इसलिए गाय को सामान्य पशु की श्रेणी से बाहर निकालकर विशेष सम्मान दिया जाना चाहिए। उनके इस बयान को राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए।
धीरेंद्र शास्त्री की यात्रा को बताया ‘जनआस्था का आंदोलन’
महोबा में शंकराचार्य ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की गौ यात्रा की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा को बचाने की कोशिश है। उनके मुताबिक, गाय भारतीय समाज की आस्था, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री जिस तरह इस मुद्दे को लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं, उससे समाज में जागरूकता बढ़ रही है। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि गाय के संरक्षण का मुद्दा किसी एक धर्म या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की भावना से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखें और गौ संरक्षण के लिए आगे आएं। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी ‘गौ माता की जय’ के नारे लगाए। महोबा में उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल होने लगा, जिसके बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच बहस छिड़ गई।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल,
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के इस बयान को आने वाले समय की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में गौ संरक्षण का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। ऐसे में एक बड़े धार्मिक संत द्वारा सार्वजनिक मंच से भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि धार्मिक मंचों से उठ रही ऐसी मांगें आने वाले समय में सरकार पर दबाव बढ़ा सकती हैं। वहीं दूसरी तरफ, गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे भारतीय संस्कृति से जुड़ा विषय बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक बयानबाजी मान रहे हैं। फिलहाल महोबा में दिया गया शंकराचार्य का बयान पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार या भाजपा नेताओं की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं।
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