राजस्थान से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जोधपुर की ओपन जेल में सजा काट रहे एक पुरुष और एक महिला कैदी ने अब शादी करने का फैसला किया है। दोनों उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं और पिछले कुछ समय से ओपन जेल में रह रहे थे। इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई और धीरे-धीरे उनके बीच बातचीत बढ़ी। साथ काम करते-करते दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे और बाद में शादी करने का निर्णय लिया। खास बात यह है कि दोनों ने अदालत से विवाह की अनुमति मांगी थी, जिसे मंजूरी मिल गई है। अब जेल परिसर में ही विवाह समारोह आयोजित किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने दी मंजूरी, जेल में ही होगा विवाह समारोह
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि दो बालिग व्यक्तियों को अपनी इच्छा से विवाह करने का अधिकार है। अदालत ने माना कि विवाह करना व्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों का हिस्सा है। इसी आधार पर कोर्ट ने जेल प्रशासन को आवश्यक नियमों का पालन करते हुए विवाह की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। आदेश के अनुसार, शादी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होगी और इसके लिए सीमित संख्या में परिजनों को भी शामिल होने की अनुमति दी जाएगी। जेल प्रशासन को सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अदालत के फैसले के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि जेल परिसर में विवाह के ऐसे मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं।
दोनों अलग-अलग मामलों में काट रहे हैं उम्रकैद की सजा
जानकारी के अनुसार, दोनों कैदी अलग-अलग हत्या के मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं और उम्रकैद की सजा भुगत रहे हैं। पुरुष कैदी को कुछ वर्ष पहले हत्या से जुड़े मामले में दोषी पाया गया था, जबकि महिला कैदी को अपने पति की हत्या के मामले में अदालत ने सजा सुनाई थी। दोनों को बाद में ओपन जेल में स्थानांतरित किया गया, जहां उन्हें काम करने और सामान्य जीवन के कुछ अवसर मिलते हैं। इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। बताया जा रहा है कि दोनों ने अपने भविष्य को लेकर गंभीरता से विचार किया और फिर विवाह का फैसला लिया। इसके बाद उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में अनुमति के लिए आवेदन किया।
परिवार के लोग भी होंगे शामिल
अदालत के आदेश के बाद अब विवाह की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शादी के दौरान पंडित समेत दोनों पक्षों के सीमित संख्या में रिश्तेदारों को जेल में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। विवाह की तारीख की जानकारी पहले से प्रशासन को देनी होगी ताकि सुरक्षा संबंधी सभी इंतजाम किए जा सकें। शादी का पूरा खर्च दोनों पक्ष स्वयं उठाएंगे। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला सिर्फ विवाह की अनुमति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक पुनर्वास के विचार को भी मजबूत करता है। माना जा रहा है कि इससे जेल में सजा काट रहे कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का एक नया अवसर मिल सकता है। फिलहाल यह अनोखी शादी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।
