Dhirendra Krishna Shastri इन दिनों Badrinath Temple में कथा कर रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा के दौरान उन्होंने केवल धार्मिक विषयों पर ही नहीं, बल्कि देश की राजनीति, युवाओं की स्थिति और बढ़ती बेरोजगारी पर भी खुलकर अपनी राय रखी। इसी दौरान उन्होंने “कॉकरोच जनता पार्टी” को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसकी चर्चा तेजी से होने लगी। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत में अब हालात ऐसे हो गए हैं कि जिन कॉकरोचों से लोग डरते थे, अब उनके नाम पर भी पार्टी बन रही है। उन्होंने इसे मजाकिया अंदाज में कहा, लेकिन इसके पीछे युवाओं और देश के स्किल डेवलपमेंट को लेकर चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस तरह की चीजें यह दिखाती हैं कि देश में बेरोजगारी बढ़ रही है और युवाओं को सही दिशा देने की जरूरत है। कथा स्थल पर मौजूद लोगों ने उनके इस बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं और सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा का विषय बन गया।
बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य पर जताई चिंता
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि देश के युवाओं की स्थिति को गंभीरता से समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि युवा सही काम और रोजगार से नहीं जुड़ेंगे, तो ऐसे अजीब प्रयोग और चर्चाएं बढ़ती रहेंगी। उनका कहना था कि देश में स्किल डेवलपमेंट की दिशा में और मजबूत काम करने की आवश्यकता है ताकि युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को केवल मनोरंजन या विवादों में उलझने के बजाय असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। कथा के दौरान उन्होंने युवाओं से मेहनत और सकारात्मक सोच अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि युवाओं को सही मंच और अवसर मिले। उनके बयान को कई लोग सामाजिक संदेश के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक टिप्पणी भी मान रहे हैं। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष दल का नाम लिए बिना अपनी बात रखी और देश की मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता जताई।
पेट्रोल-डीजल की खपत और नेताओं पर भी बोले
कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत और तेल बचाने की अपील पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा लोगों से ईंधन का कम इस्तेमाल करने की अपील की गई थी, लेकिन उन्होंने तो पहले से ही वाहन का इस्तेमाल काफी कम कर दिया था। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह लिखकर देने को तैयार हैं कि उन्होंने एक महीने में एक लीटर तेल भी खर्च नहीं किया। हालांकि इसके बाद उन्होंने नेताओं और वीआईपी संस्कृति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आम जनता से तो तेल बचाने की अपील की जाती है, लेकिन नेताओं के चार्टर्ड विमानों और बड़े काफिलों पर भी नियंत्रण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नेताओं के विशेष विमानों और फिजूल खर्ची पर रोक लगे तो जनता को ज्यादा अच्छा संदेश जाएगा। सभा में मौजूद लोगों ने उनके इस बयान पर तालियां बजाईं। उन्होंने यह भी कहा कि देश की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए केवल आम लोगों से त्याग की उम्मीद करना सही नहीं है।
नेताओं की सैलरी रोकने का भी दिया सुझाव
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में नेताओं की सैलरी को लेकर भी बड़ा सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यदि देश को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाना है तो कुछ समय के लिए नेताओं की सैलरी पर भी रोक लगाई जा सकती है। उनका कहना था कि जब आम जनता से लगातार त्याग और बचत की अपील की जाती है, तब जनप्रतिनिधियों को भी उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा और लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। कथा के दौरान उन्होंने कई बार इस बात पर जोर दिया कि देश को मजबूत बनाने में सभी की बराबर जिम्मेदारी होनी चाहिए। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके सुझावों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे केवल बयानबाजी मान रहे हैं। फिलहाल उनका यह बयान चर्चा में बना हुआ है और राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक इस पर बहस जारी है।
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