कर्नाटक की राजनीति में कई दिनों से चल रहा सत्ता संघर्ष आखिरकार खत्म हो गया। लंबे समय से मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच Siddaramaiah ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही यह साफ हो गया कि अब राज्य की कमान D. K. Shivakumar संभालेंगे। गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री आवास पर हुई अहम बैठक के बाद यह फैसला सामने आया। बैठक के दौरान डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया और दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। कांग्रेस नेताओं ने इसे पार्टी की एकजुटता बताया, लेकिन विपक्ष ने इसे लेकर सरकार और कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। राजनीतिक गलियारों में अब इस बदलाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। BJP नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के भीतर सत्ता को लेकर अंदरूनी खींचतान लंबे समय से चल रही थी और अब जाकर उसका अंत हुआ है।
BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना
सत्ता परिवर्तन के बाद BJP ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। BJP नेता Gaurav Vallabh ने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी के भीतर “टेंडरिंग व्यवस्था” चल रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद किसी राजनीतिक प्रक्रिया से नहीं, बल्कि “हाईएस्ट बिड” के आधार पर तय होता है। उनका कहना था कि जिस नेता की पकड़ ज्यादा मजबूत होती है, वही कुर्सी हासिल कर लेता है। गौरव वल्लभ ने यह भी कहा कि सिद्धारमैया की “बिड कमजोर” पड़ गई, इसलिए उन्हें पद छोड़ना पड़ा। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन का तरीका लोकतांत्रिक नहीं दिखता। विपक्षी दल इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और सत्ता संघर्ष का नतीजा बता रहे हैं। बीजेपी नेताओं ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस को लगातार घेरना शुरू कर दिया है।
राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन पर भी उठे सवाल
बीजेपी नेताओं ने इस मुद्दे के जरिए केवल कर्नाटक कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन पर भी सवाल उठाए हैं। गौरव वल्लभ ने कहा कि कांग्रेस लगातार दावा करती है कि Rahul Gandhi विपक्षी गठबंधन के सबसे बड़े नेता हैं, लेकिन पहले यह तय होना चाहिए कि “इंडिया गठबंधन” वास्तव में मौजूद भी है या नहीं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में विपक्षी दल साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ते, बल्कि अलग-अलग रणनीति अपनाते हैं। बीजेपी नेता ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विपक्षी दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा। ऐसे में गठबंधन की मजबूती और नेतृत्व दोनों पर सवाल उठते हैं। बीजेपी का कहना है कि विपक्षी दल केवल चुनावी जरूरतों के समय एकजुट होने की बात करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी रणनीति अलग-अलग होती है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है।
कांग्रेस ने दिखाई एकजुटता, लेकिन बहस जारी
हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कर्नाटक में हुआ नेतृत्व परिवर्तन पार्टी की अंदरूनी सहमति और रणनीति का हिस्सा है। पार्टी नेताओं ने कहा कि सत्ता परिवर्तन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हुआ और इससे संगठन और सरकार दोनों मजबूत होंगे। डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के एक-दूसरे को गले लगाने वाली तस्वीरों को कांग्रेस एकता का संदेश बता रही है। दूसरी तरफ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से दो बड़े नेताओं के बीच शक्ति संतुलन की राजनीति चल रही थी। अब डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल बीजेपी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमलावर है, जबकि कांग्रेस इसे सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बता रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कर्नाटक में नया नेतृत्व सरकार और संगठन को किस दिशा में लेकर जाता है।
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