शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों अपनी ‘गविष्टि गो-रक्षा धर्मयुद्ध यात्रा’ को लेकर चर्चा में हैं। इसी यात्रा के तहत वह Hamirpur पहुंचे, जहां उन्होंने गौसंरक्षण और हिंदुत्व की राजनीति को लेकर कई तीखे बयान दिए। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग गाय को केवल सीमित समय तक “मां” मानते हैं और उसके बाद उसका महत्व खत्म हो जाता है। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि “गाय 14 वर्ष तक मां रहेगी, उसके बाद सब्जी-भाजी हो जाएगी।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। शंकराचार्य ने कहा कि देश में गौसंरक्षण को लेकर जितनी बातें होती हैं, जमीन पर उतना काम दिखाई नहीं देता। उन्होंने दावा किया कि आज भी देश के कई हिस्सों में गायों की स्थिति बेहद खराब है और इस मुद्दे को सिर्फ राजनीति तक सीमित कर दिया गया है। उनके बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
हिंदुत्व की राजनीति और नेताओं की सोच पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कुछ नेताओं के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे उनकी असली सोच सामने आती है। उन्होंने बिना ज्यादा नाम लिए कहा कि कई बार राजनीतिक नेता ऐसे बयान दे देते हैं, जिनसे यह लगता है कि गौसंरक्षण केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल और असम के कुछ नेताओं के हालिया बयानों का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदुत्व केवल नारों से मजबूत नहीं होगा, बल्कि इसके लिए व्यवहार में भी बदलाव जरूरी है। उनका कहना था कि यदि गाय को वास्तव में पूजनीय माना जाता है तो उसके संरक्षण के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि गौवंश की दुर्दशा देखकर दुख होता है, क्योंकि एक ओर लोग गाय को माता कहते हैं और दूसरी ओर सड़कों पर बेसहारा घूमती गायें नजर आती हैं। उन्होंने सरकारों से अपील की कि गौसंरक्षण को केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इस दिशा में मजबूत नीति और सख्त कानून बनाए जाएं।
सड़क पर नमाज और गौशाला विवाद पर भी बोले
मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सड़क पर नमाज पढ़ने के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि नमाज एक पवित्र धार्मिक प्रक्रिया है और इसे किसी धार्मिक या उचित स्थान पर ही किया जाना चाहिए। उनके अनुसार सड़क सार्वजनिक स्थान होती है, जहां लगातार लोगों का आना-जाना लगा रहता है, इसलिए वहां किसी भी धार्मिक आयोजन से बचना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने हमीरपुर में एक गौशाला के निरीक्षण को लेकर प्रशासन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वह एक गौ आश्रम का निरीक्षण करना चाहते थे, लेकिन वहां ताला लगा दिया गया और उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। प्रशासन की ओर से अनुमति की जरूरत बताई गई, जिससे वह नाराज नजर आए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि गौशाला में गायों की हालत अच्छी नहीं है। शंकराचार्य ने कहा कि यदि सब कुछ सही था तो निरीक्षण से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी। इस बयान के बाद स्थानीय प्रशासन भी चर्चा में आ गया है।
गौ रक्षा यात्रा के जरिए लोगों को जागरूक करने की कोशिश
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उनकी ‘गविष्टि गो-रक्षा धर्मयुद्ध यात्रा’ का उद्देश्य लोगों को गौसंरक्षण के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा गोरखपुर से शुरू हुई है और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से गुजर रही है। यात्रा के दौरान वह लोगों से मिल रहे हैं और गायों की सुरक्षा व देखभाल को लेकर संदेश दे रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि इतने लंबे समय के बाद भी गौसंरक्षण के क्षेत्र में अपेक्षित बदलाव नहीं दिखाई देता। उनके मुताबिक आज भी कई स्थानों पर अवैध कटान और गोवंश के व्यापार की खबरें सामने आती रहती हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकारें सख्त इच्छाशक्ति दिखाएं तो इस समस्या पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। फिलहाल उनके बयान सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा में बने हुए हैं और कई लोग इसे हिंदुत्व की राजनीति पर बड़ा सवाल मान रहे हैं।
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