यह हैरान कर देने वाला मामला उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर होने वाले प्यार और फर्जी पहचान के खतरों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। फरीदपुर थाना क्षेत्र के पचौमी गांव के रहने वाले अभिषेक की मुलाकात फेसबुक पर बदायूं की साधना नाम की महिला से हुई थी। बातों का सिलसिला शुरू हुआ, तो साधना ने खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी बताया। उसने अभिषेक को झांसा दिया कि एक अदालती मामले की वजह से उसकी जॉइनिंग रुकी हुई है, जो जल्द ही क्लियर हो जाएगी। साधना की बातों और उसके रसूख के जाल में फंसकर अभिषेक ने उससे प्यार कर लिया। साधना के परिवार वालों ने भी इस झूठ को इस तरह पेश किया कि पीड़ित परिवार पूरी तरह भरोसे में आ गया। आखिरकार, 7 फरवरी 2025 को दोनों ने धूमधाम से सात फेरे ले लिए।
नौकरी का लालच और लाखों के जेवर साफ
शादी के बाद कुछ दिनों तक तो सब ठीक रहा, लेकिन धीरे-धीरे ‘अफसर’ पत्नी का असली रंग सामने आने लगा। साधना ने अपने रसूख का धौंस दिखाते हुए और कोर्ट केस का बहाना बनाकर घर के कीमती सामानों पर कब्जा करना शुरू कर दिया। उसने अभिषेक की सोने की चेन, अंगूठी और उसकी मां के पुश्तैनी गहनों समेत करीब 15 तोला सोना और डेढ़ किलो चांदी अपने पास रख ली। इतना ही नहीं, साधना और उसके परिवार ने अभिषेक को भी अपने प्रभाव से सरकारी नौकरी दिलाने का बड़ा दावा किया था, जिसके बदले में धीरे-धीरे पैसों की मांग की जाने लगी। जब भी अभिषेक या उसका परिवार कोई सवाल उठाता, साधना अपने कथित प्रशासनिक पद का डर दिखाकर उन्हें चुप करा देती थी।
40 लाख की डिमांड और आधी रात को खूनी खेल
साधना की लालच की हद तब पार हो गई जब उसने अभिषेक के परिवार पर उनकी 20 बीघा पुश्तैनी जमीन बेचकर अस्पताल बनवाने का दबाव डाला और अलग से 40 लाख रुपये की मांग की। जब पीड़ित परिवार ने इतनी बड़ी रकम देने से साफ इनकार कर दिया, तो लेडी अफसर का मुखौटा पूरी तरह उतर गया। उसने पूरे परिवार को फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी। हद तो तब हो गई जब 12-13 मार्च 2026 की दरमियानी रात को साधना ने सो रहे अभिषेक का गला दबाकर उसे जान से मारने की कोशिश की। अभिषेक किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागा और तुरंत पुलिस की डायल-112 हेल्पलाइन को सूचना दी, जिसके बाद इस पूरे हाई-प्रोफाइल ड्रामे का भंडाफोड़ हुआ।
सलाखों के पीछे पहुंची फर्जी IAS, जांच में जुटे राज
इस खौफनाक घटना के बाद गांव में पंचायत भी बुलाई गई, जहां साधना ने गहने अपने पास होने की बात तो मानी, लेकिन उसकी ठगी की परतें खुलती चली गईं। जांच में पता चला कि वह पहले भी कई लोगों को इसी तरह का शिकार बना चुकी है। पीड़ित अभिषेक की शिकायत पर बरेली की फरीदपुर थाना पुलिस ने 28 जून को साधना, उसके पिता नरेंद्र पाल सिंह, भाई सूर्यप्रताप और रिश्तेदार राजेंद्र सिंह के खिलाफ संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला साधना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस साजिश में उसके परिवार के अन्य सदस्यों की क्या भूमिका थी और साधना ने अब तक और कितने लोगों को अपनी फर्जी पहचान से चूना लगाया है।
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